रोहिंग्या मुस्लिमों पर जारी हिंसा के बीच रखाइन प्रांत की एक मस्जिद में विस्फोट की खबर सामने आ रही है. साथ ही आसपास के करीब 20 घरों में आगजनी भी की गई है. इस वारदात के पीछे बौद्ध चरमपंथियों का हाथ माना जा रहा है. हालांकि म्यांमार सेना प्रमुख ने रोहिंग्गा उग्रवादियों को दोषी ठहराया है.

वहीँ एक राईट ग्रुप का कहना है कि शरणार्थियों को वापस लौटने से रोकने के लिए इस क्षेत्र में आग सेना ने लगाई है. शनिवार को म्यांमार के कमांडर इन चीफ मिन आंग हलाइंग ने फेसबुक पर एक बयान जारी कहा था कि रोहिंग्या आतंकियों ने शुक्रवार को उत्तर रखाइन के मस्जिद और मदरसा के बीच विस्फोट किया.

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सेना प्रमुख के बयान में कहा, “जैसा कि हमारे ग्रामीण लोग अपने घर छोड़ना नहीं चाहते थे, इसलिए आतंकियों ने प्रार्थना के दौरान लोगों को आतंकित करने के लिए बम फेंक दिया”

वहीँ राईट ग्रुप का कहना है कि सेना ने इस का इल्जाम आतंकवादियों पर लगा दिया. जबकि ये काम सेना का है. इसके पुरे सबूत हैं. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि नए वीडियो और सैटेलाइट इमेजरी से पुष्टि हुई है कि अभी भी रोहंगिया गांवों को जलाया जा रहा है.

एमनेस्टी से हसन तराना ने कहा कि वे केवल रोहिंग्या मुस्लिमों को निकालने पर ही संतुष्ट करना चाहते बल्कि वे चाहते है कि रोहिंग्या अगर दुबारा वापस लौटे तो उनके लिए कोई घर न हो.