Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

जर्मन अर्थशास्त्री का खुलासा – मोदी सरकार ने अमेरिका के इशारे पर की थी नोटबंदी

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पिछले 7 नवंबर की रात को प्रधानमंत्री ने 500 और 1000 के नोटों को अमान्य कर नए नोट जारी करने के फैसला अमेरिका के इशारों पर किया था. इस बात का खुलासा जर्मनी के अर्थशास्त्री नॉर्बटर् हेरिंग ने किया है.

जीरोहेज डॉट कॉम (zerohedge.com) जॉर्ज्स वॉशिंग्टन के ब्लॉग में उन्होंने कहा कि भारतीयों पर यह हमला होने से चार हफ्ते पहले यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी ऑफ इंटरनेशनल डेवलेपमेंट (यूएसएआईडी) ने ‘कैटलिस्टः कैशलेस पेमेंट पार्टनरशिप’ की स्थापना किए जाने का ऐलान किया था.

हेरिंग ने बताया, 14 अक्टूबर का प्रेस स्टेटमेंट बताता है कि कैटलिस्ट यूएसएआईडी और वित्त मंत्रालय के बीच होने वाली अगले चरण की साझेदारी जैसा है. उन्होंने कहा, कैशलेस कैटलिस्ट की वेबसाइट http://cashlesscatalyst.org/ पर इससे जुड़ी कुछ जानकारी मिलती है.

उन्होंने कहा, कैश से परे रिपोर्ट से जुड़ी प्रेजेंटेशन में यूएसएआईडी ने ऐलान किया कि तकरीबन 35 भारतीयों, अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने यूएसएआईडी और वित्त मंत्रालय के साथ इस पहल पर साझेदारी की. हेरिंग ने बताया, इसमें अधिकतर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और पेमेंट सेवा मुहैया कराने वाले क्षेत्रों के लोग शामिल हैं.

हेरिंग ने लिखा, वे डिजिटल पेमेंट्स या फिर उससे जुड़े डेटा को तैयार कर रुपए कमाना चाहते हैं, जिनमें से अधिकतर डच बैंक सरीखी संस्थाओं के अनुभवी लोग हैं. इसे कैश पर इच्छुक आर्थिक संस्थाओं की जंग (war of interested financial institutions on cash) करार दिया.

इसके अलावा बेटर दैन कैश अलाइंस, द गेट्स फाउंडेशन (माइक्रोसॉफ्ट), ओमिद्यार नेटवर्क (ई-बे), द डेल फाउंडेशन मास्टरकार्ड, वीजा और मेटलाइफ फाउंडेशन के लोग भी इस कतार में शामिल हैं

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