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तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान की जीत ने एक बार फिर से मुस्लिम दुनिया में उम्मीद भर दी है। इस सबंध मे पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि एर्दोगान की जीत से न केवल मुस्लिम दुनिया मजबूत होगी बल्कि दुनिया में मुसलमानों की आवाज को भी ताकत मिलेगी।

इस बारे मे ‘जंग’ लिखता है कि एर्दोगान को मुस्लिम जगत की समस्याओं की पूरी जानकारी है। जिसके समाधान के लिए भी वे जूझते है। एर्दोगान ने ही तुर्की को न सिर्फ बदतरीन आर्थिक तंगी से निकाला है, बल्कि शिक्षा, विज्ञान और टेक्नोलॉजी समेत जीवन के सभी क्षेत्रों में तरक्की दी।

वही नवा ए वक्त लिखता है कि पहले विश्वयुद्ध के बाद तुर्की का अस्तित्व खतरे में पड़ गया था। जिसे मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने अपनी होशियारी से संभाल आधुनिक तुर्की के रूप मे संवारा। इस दौरान तुर्की इस्लाम से दूर होता चला गया।लेकिन एक बार फिर से तुर्की इस्लामी रुझान को अपना रहा है। ऐसे मे अब एर्दोगान को ष्ट्रपति चुना जाना तुर्की, उसकी जनता, मस्लिम दुनिया और जुल्मों के शिकार मुसलमानों के लिए बहुत ही खुशी की बात है।

इसके अलावा ‘जसारत’ ने कहा कि उनकी जीत से मुस्लिम जगत में स्थिरता आएगी।अखबार के मुताबिक पाकिस्तान को भी तुर्की से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। वहीं रोजनामा ‘पाकिस्तान’ लिखता है कि एर्दोगान अपनी लोकप्रियता के शिखर पर हैं और वह अपने देश के निर्वाचित नेता के तौर पर दुनिया में तुर्की का नाम ऊंचा कर रहे हैं।

बता दें कि तीन बार तुर्की के प्रधानमंत्री रह चुके एर्दोगान कमाल अतातुर्क के बाद से तुर्की के सबसे ताक़तवर नेता हैं। एर्दोगान अब अकेले वो शख़्स होंगे जो वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर, मंत्रियों, जजों और उप राष्ट्रपति की नियुक्ति करेंगे। वे ही देश की न्यायिक व्यवस्था में दखल दे सकेंगे, वो ही देश में बजट का बंटवारा करेंगे।

वह न सिर्फ़ अगले पांच साल के लिए सरकार के सर्वेसर्वा बने रहेंगे बल्कि वो साल 2023 में भी चुनाव लड़ सकते हैं और जीतने पर साल 2028 तक सत्ता में बने रह सकते हैं।

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