तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने गुरुवार को कहा कि यदि राष्ट्रपति येरेवन क्षेत्रीय शांति के लिए सकारात्मक कदम उठाए तो तुर्की आर्मेनिया के साथ अपने सीमावर्ती द्वार खोल सकता है। उन्होंने अपने अजेरी समकक्ष के साथ छह-देशीय क्षेत्रीय सहयोग मंच बनाने पर चर्चा की।

अजेरी राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ बोलते हुए, एर्दोआन ने कहा कि उनका मसला अर्मेनिया के नेतृत्व के साथ है उनके लोगों के साथ नहीं। उन्होंने आगे कहा, अर्मेनिया तुर्की, रूस, ईरान, अजरबैजान और जॉर्जिया के साथ नियोजित क्षेत्रीय मंच में भाग ले सकता है यदि यह क्षेत्रीय शांति में योगदान देता है।

उन्होंने इस साल की शुरुआत में अजरबैजान और अर्मेनिया के बीच सप्ताह भर से चली आ रही सीमा झड़पों को समाप्त करने में रूस की भूमिका की प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने फ्रेंच नेशनल असेंबली के प्रस्ताव को नागोरोनो-काराबाख को एक अलग गणराज्य के रूप में मान्यता देने पर फटकारा।

उन्होंने कहा, “यहां तक कि अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोलस] पशिनियन इसे स्वीकार नहीं करते हैं,” उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने “अभी तक राजनीति नहीं सीखी है।” उन्होंने कहा कि अज़रबैजान प्रशासन तीन से पांच वर्षों के भीतर करबख में प्रगति के युग को पूरा करेगा।

एर्दोआन ने कहा, “आज पूरी तुर्क दुनिया के लिए जीत और गर्व का दिन है।” एर्दोआन ने यह भी चेतावनी दी कि क्षेत्रों की मुक्ति का मतलब यह नहीं है कि संघर्ष समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, “राजनीतिक और सैन्य क्षेत्रों में किए गए संघर्ष अभी भी कई अन्य मोर्चों पर जारी रहेंगे।”

उन्होने कहा, “हमें उम्मीद है कि अर्मेनियाई राजनेता अपनी वर्तमान स्थिति का सही मूल्यांकन करेंगे और तदनुसार भविष्य की रणनीतियों की योजना बनाएंगे। यदि अर्मेनियाई लोग हाल के नागोर्नो-करबाख युद्ध से आवश्यक सबक भी लेंगे, तो इससे क्षेत्र में एक नए दौर की शुरुआत होगी।”

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