चौथे टीआरटी वर्ल्ड फोरम को संबोधित करते हुए तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने कहा कि “अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में तुर्की की उपलब्धियां, देश में महान परिवर्तन को विश्व स्तर पर प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।” उन्होंने कहा “कई मामलों में, हमारी उपलब्धियों को भी खारिज या विकृत कर दिया जाता है।”

उन्होने कहा, सीरिया में हजारों नागरिकों का  खून बहा देने वाले आतंकवादी वाईपीजी/पीकेके के दोहरे मानकों को नकारते हुए, “प्रतिष्ठित” पश्चिमी पत्रिकाओं के कवरों को सुशोभित करते हैं। एर्दोआन ने कहा कि जो लोग आजादी पर तुर्की को व्याख्यान देने की कोशिश करते हैं। वे यूरोप के “तीन बंदर”, पीकेके के बुरे कृत्यों को पहचानने से इनकार करते हैं।

प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन करने और पुलिस की बर्बरता को रोकने के प्रयासों में बाधा डालने के लिए हाल ही में प्रस्तावित फ्रांसीसी सुरक्षा कानून की आलोचना करते हुए उन्होने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने फ्रांस इस मामले में चुप्पी साधे रखी।”

एर्दोआन ने “फिलिस्तीनियों के खिलाफ भी इजरायली सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर एक समान दोहरे मानक अपनाने का आरोप लगाया। जो राज्य प्रयोजित आतंकवाद की तरह है।” उन्होने ये भी कहा कि “जब मीडिया आउटलेट इस्लामोफोबिया और ज़ेनोफ़ोबिया के बैनर आ जाते हैं, तो यह शर्मनाक है।”

उन्होंने चेतावनी दी, “प्रेस की स्वतंत्रता की आड़ में किए गए कुकृत्य कार्य विभिन्न संघों और संस्कृतियों के लोगों के बीच सह-अस्तित्व की इच्छा को जहर देने का काम करते हैं। अगर प्रेस की आजादी की आड़ में दिखाए जाने वाले हतोत्साहित रवैये को नहीं रोका गया, तो यूरोप और मानवता दोनों ही पीड़ित होंगे।”

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