मिस्र की सबसे बड़ी अपील कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को 2011 के विद्रोह के दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की हत्या की साज़िश रचने के आरोप से बरी कर दिया है.

मिस्र की अदालत ने गुरुवार की शाम अपने फैसले में  कहा है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक वर्ष 2011 में हुए प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के जनसंहार के ज़िम्मेदार नहीं हैं और अदालत, आरोपी को निर्दोष क़रार देती है. मुबारक को 2012 में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई थी लेकिन इस केस की दो बार फिर से सुनवाई हुई.

मुबारक को गबन के एक मामले में तीन साल जेल की सज़ा पूरी करने के बावजूद एक सैन्य अस्पताल में नज़रबंद रखा गया है. मई 2015 में एक जज ने फ़ैसला सुनाया था कि मुबारक को हिरासत से रिहा किया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी की सरकार कथित तौर पर उन्हें रिहा करने में इच्छुक नहीं थी.

अदालत ने इसी प्रकार वर्ष 2011 में प्रदर्शनों के दौरान मारे जाने वालों के परिजनों की इस मांग को रद्द कर दिया कि मुबारक के खिलाफ अन्य केस फिर से चलाए जाएं. इस प्रकार से अब हुस्नी मुबारक के खिलाफ मुक़द्दमा चलाने की संभावना खत्म हो गयी.

सीसी मुबारक सरकार में सैन्य ख़ुफ़िया प्रमुख थे और उन्होंने 2013 में लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने गए मुबारक के उत्तराधिकारी मोहम्मद मोर्सी को हटाने के लिए हुए सैन्य तख़्तापलट की अगुवाई की थी.


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