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काहिरा। काहिरा की एक आपराधिक अदालत ने देश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी और 19 अन्य को न्यायपालिका को अपमानित करने के मामले में तीन वर्ष कैद की सजा सुनायी है तथा 112,700 डालर का जुर्माना लगाया है।  मुर्सी के अलावा मिस्र के कार्यकर्ता आला अब्देल फतह और सांसद एवं टेलीविजन प्रस्तोता तावफिक ओकाशा को दस लाख मिस्र पौंड का जुर्माना लगाया है। हालांकि इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा सकती है।

मिस्र की 2011 की क्रांति के बाद मुर्सी लोकतांत्रिक तरीके रूप से 2013में पूर्व रूप से चुने गये थे। 2013 के मध्य में तत्कालीन जनरल अब्दुल फतेह अल-सिसी ने उन्हें सत्ता से हटा दिया था। इसके तुरंत बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और अब वह वर्ष 2012 में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की हत्याओं के लिए भड़काने के मामले में 20 वर्ष कैद तथा कतर के लिए जासूसी करने के मामले में 25 वर्ष की सजा काट रहे हैं।

मुर्सी को राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी दस्तावेज चुराने के जुर्म में 15 साल की अतिरिक्त सजा दी गई जिससे उनकी सजा बढ़कर 40 साल हो गई। छह सह प्रतिपादियों में जेल में बंद डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता अहमद अब्दो अली अफीफी, रस्द न्यूज नेटवर्क (आरएनएन) के संवाददाता अस्मा अल खतीब हैं जिन पर मोरसी के मुस्लिम ब्रदरहुड से से जुड़े होने का संदेह है।

दो अन्य में अलजजीरा के कर्मचारी न्यूज प्रोड्यूसर अल उमर मोहम्मद और समाचार संपादक इब्राहिम मोहम्मद हिलाल हैं। प्रतिपादियों पर गोपनीय दस्तावेज कतर को लीक करने और उन्हें अलजजीरा चैनल को बेचने का आरोप है। गोपनीय दस्तावेज में कथित तौर पर सामान्य और सैन्य खुफिया, सैन्य बलों, आयुध भंडार और देश की गोपनीय नीति पर सूचनाएं थी।

ध्यान रहे कतर मोरसी के 2012 से लेकर जुलाई 2013 तक के शासन काल में उनका प्रमुख समर्थक था। हाल के दिनों में मिस्र सहित सऊदी अरब, बहरीन यूएई ने कतर पर आतंकियों के वित्तपोषण का आरोप लगाकर सबंध तोड़ रखे है।

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