इस्राईल की एक अध्य्यन रिपोर्ट बताती है कि मिस्र ग़ाज़ा पट्टी में ईरान के प्रभाव को क़तर और तुर्की के प्रभाव पर प्राथमिक्ता देता है।

सामुदायिक और सरकार मामलों के केंन्द्र “क़ुद्स” ने एक अध्ययन जिसका शीर्षक “ईरान के साथ फ़िलिस्तीन के संबंधों की मज़बूती” था कहा है कि मिस्र भविष्य में उस रास्ते पर जाएगा जहां वह ग़ाज़ा पट्टी में ईरान के प्रभाव को क़तर और तुर्की के प्रभाव पर प्राथमिक्ता देगा, क्योंकि क़तर और तुर्की मिस्र के दो शत्रु और इस देश के लिए ख़तरा हैं।

ज़ायोनी कबिनेट के क़रीबी प्रोफ़ेसर बवहास अनबारी जो इस अध्ययन के अध्ययनकर्ता है कहते हैं: ग़ाज़ा में शक्ति संतुलन के प्रकाश में एक तरफ़ तुर्की और क़तर (ग़ाज़ा और इस्राईल के बीच स्थित मार्ग के माध्यम से) और दूसरी तरफ़ ईरान का प्रभाव (सिनाई की तरफ़ से) कारण बनता है कि भविष्य में काहेरा ईरान के प्रभाव को प्राथमिक्ता दे।

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अलमयादीन चैनल के अनुसार अनबरी ने लिखा कि अब्दुल फ़त्ताह सीसी के नेतृत्व वाला मिस्र ग़ाज़ा में हमास आंदोलन के नए प्रमुख यहया सनवारी से सिनाई प्रायद्वीप में दाइश के विरुद्ध लड़ाई में सहायता की आशा नहीं रखता है क्योंकि यह संगठन सहायता और हथियारों के स्थानान्तरण के रास्तों की सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित किए हुए है।

इसी प्रकार उन्होंने लिखा कि सिनाई और उसके बाहर मिस्र और ज़ायोनी शासन के बीच सुरक्षा सहयोग के बावजूद मिस्र तुर्की और क़तर को अपने लिए ख़तरा मानता है।

इस इस्राईली शोधकर्ता ने अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प की सरकार और वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों के एलान, नेतनयाहू की ट्रम्प से हालिया मुलाक़ात और राजनीतिक हालात की तरफ़ इशारा करते हुए लिखा कि इस मुलाक़ात में ईरान के विरुद्ध प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोग ज़ोर दिया गया है और यह एक ऐसा क़दम है जो ईरान को ग़ाज़ा में अपना प्रभाव बढ़ाने की तरफ़ ले जाएगा ताकि वह इस्राईल के विरुद्ध एहतियाती उपाय अंजाम दे सके।

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