Tuesday, January 25, 2022

बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने सीएए और एनआरसी को बताया गैरजरूरी

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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर पहली बार टिप्पणी करते हुए इन दोनों क़ानूनों को गैरजरूरी बताया। हालांकि उन्होने ये भी कहा कि ये भारत का अंदरूनी मामला है।

गल्फ न्यूज को दिए इंटरव्यू के दौरान शेख हसीना ने सीएए पर कहा कि हम यह नहीं समझते कि (भारत सरकार) ने ऐसा क्यों किया। यह जरूरी नहीं था। हसीना का यह बयान बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए.के. अब्दुल मोमन बयान के एक हफ्ते बाद आया है। मोमन ने कहा था कि सीएए और एनआरसी भारत के ‘आंतरिक मुद्दे’ हैं, लेकिन चिंता व्यक्त की कि देश में किसी भी ‘अनिश्चितता’ से उसके पड़ोसियों को प्रभावित होने की संभावना होती है।

अखबार ने कहा है कि बांग्लादेश की 161 मिलियन आबादी जिसमें 10.7 प्रतिशत हिंदू और 0.6 प्रतिशत बौद्ध की है। शेख हसीना संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में हैं। उन्होंने कहा कि भारत से कोई रिवर्स माइग्रेशन का रिकॉर्ड नहीं है। नहीं, भारत से कोई रिवर्स माइग्रेशन नहीं हुआ है। लेकिन भारत के भीतर, लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हसीना ने कहा कि (फिर भी), यह एक आंतरिक मामला है।

हसीना ने कहा, बांग्लादेश ने हमेशा से कहा है कि सीएए और एनआरसी भारत के आंतरिक मामले हैं। भारत सरकार ने भी यही बात दोहराई है। अक्टूबर, 2019 में नई दिल्ली की यात्रा के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे व्यक्तिगत रूप से यह आश्वासन दिया था। बांग्लादेश और भारत के बीच विभिन्न क्षेत्रों में प्रगाढ़ संबंध हैं। असम में अवैध बांग्लादेशियों की पहचान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एनआरसी की प्रक्रिया शुरू की गई थी। 30 अगस्त को प्रकाशित अंतिम एनआरसी से 19 लाख लोगों को बाहर रखा गया।

वहीं सीएए को 11 दिसंबर, 2019 को भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था और 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से उत्पीड़न के शिकार हुए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए नागरिकता का मार्ग प्रदान करता है। इसमे मुस्लिमों शामिल नहीं किया गया। जिसके चलते देश भर में इस कानून का विरोध हो रहा है।

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