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इस बार यह अमरीका होगा जो इस जाल में फसेगा, और उसको इराक़ और सीरिया में इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी होगी, क्योकि इन दोनों देशों में अमरीकी सैन्य सलाहकारों के अतिरिक्त 8 हज़ार से अधिक अमरीकी सैनिक मौजूद हैं।

सीरिया के आकाश में एक सप्ताह के अंदर चार विमानों का गिरना जिसमें एक इस्राईल का युद्धक विमान भी है जिसकों रूस निर्मिन वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया था, और रूस का वह विमान जिसे अमरीका निर्मित कंधे पर रखकर दागे जाने वाली मीसाइल से गिराया गया। कह कहना होगा कि इस समय सीरिया के आकाश में कम से कम 6 देशों के विमान उड़ान भर रहे हैं जिनमें से दो देश यानी रूस और अमरीका विश्व शक्ति हैं।

शीत युद्ध का बढ़ता खतरा

सीरिया की धरती इस समय प्राक्सी वार का अड्डा बन गया है, जो कि शीत युद्ध के खतरे को दिन ब दिन बढ़ा रहा है।

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मास्को ने दैर अलज़ूर में अमरीकी हमले में अपने पाँच सैनिकों की मौत की पुष्टि की

इसी बीच रूस के विदेश मंत्रालय ने दैर अलज़ूर में सीरिया समर्थक सैनिकों पर अमरीका के हवाई और मीसाइल हमले में अपने पाँच नागरिकों की मौत की पुष्टि की है। इस संबंध में क्षेत्रीय सूत्रों का कहना है कि मारे जाने वाले यह लोग रूस के रिटायर्ड सैनिक थे तो सीरिया समर्थक सैनिकों के साथ मिलकर लड़ रहे थे।

अमरीका के सीधे हमले में रूसी नागरिक की मौत

सीरिया युद्ध के आरम्भ होने के बाद से अब तक यह पहली बार है कि जब अमरीका के सीधे हमले में रूसी नागरिक की मौत हुई है। इसलिए इस घटना के बुरे परिणाम हो सकते हैं, और रूस बदले की कार्यवाही कर सकता है, वह देश जो धैर्य रखने वाला है और जल्दबाज़ी मे कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है।

अमरीकी हमले में अपने नागरिकों की मौत को मास्को ने क्यों स्वीकार किया?

निःसंदेह रूस के विदेश मंत्रालय द्वारा इन लोगों की मौत की पुष्टि किया जाना उच्च अधिकारियों के आदेश से हुआ है, ताकि इस प्रकार उन अमरीकी मीडिया स्रोतों को उत्तर दिया जा सके जो सीरिया में रूसी सैनिकों की बढ़ती हानि और मौत के बारे में लिख रहे हैं, इसीलिए उसने स्पष्ट कहा है कि मारे जाने वाले लोगों की संख्या 400 या 200 या 100 नहीं बल्कि केवल पाँच लोग हैं।

सीरिया में अमरीका और रूस के बीच प्राक्सी वार की संभावना

इस हमले का खतर केवल रूसों को होने वाली संख्या में सीमित नहीं है बल्कि उसके परिणाम सीरिया में दो विश्व शक्तियों के बीच प्राक्सी वार का खतरा है, युद्ध की स्थिति बदल चुकी है और संभव है कि भविष्य में किसी गलती या जानबूछ किए जाने वाले कार्य से दोनों देशों के बीच सीधा टकराव हो जाए, इस बीच इस बिंदू पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि पहला विश्व युद्ध ऑस्ट्रिया के उपराष्ट्रपति की हत्या से शुरू हुआ था।

अमरीका सीरिया से निकलने की सोंच भी नहीं रहा है

दूसरी तरफ़ वह निशानियां स्पष्ट हैं जो दिखाती हैं कि अमरीका जिसके सीरिया में दो हज़ार से अधिक सैनिक हैं वह सीरिया से निकलने के बारे में सोंच भी नहीं रहा है, यहां तक कि तब भी जब कि उनके पास अब दाइश की होने का बहाना भी नहीं बचा है। और इस संबंध में कई अमरीकी अधिकारियों ने बयान दिया है, इस देश की सेनाएं सीरिया में ईरान के प्रभाव से मुकाबले के लिए अनिश्चित अवधि तक रुकी रहेंगी।

सीरिया में अफगानिस्तान का परिदृष्ट दोहराए जाने के संबंध में अमरीकी अधिकारियों के बयान

एक और विचारधारा जो आज के समय में पश्चिमी हलके में सामने आ रही है इस समय ट्रम्प और अमरीका के सैन्य अधिकारी सीरिया में अफगानिस्तान का परिदृष्य दोहराने की बात कह रहे है इस प्रकार कि कुर्द या फिर दूसरे शब्दों में कहा जाए सीरियन डेमोक्रेटिक बल जिसका वाशिंगटन समर्थन कर रहा है और उसी के साथ इस्लामी उग्रवाद और नए सैनिकों के साथ मिलकर रूसों के विरुद्ध मोर्चा खोलें, बिलकुल वैसा ही जैसे कि सोवियत बलों के विरुद्ध अफगान बलों ने किया था।

सीरिया में तुर्क बलों के विरुद्ध अमरीकी धमकी पर एर्दोगान की प्रतिक्रिया

इस बीच यह भी कोई इत्तेफाक़ नहीं था कि जब तुर्की के राष्ट्रपति ने अमरीकी जनरल फोंक की उत्तर में “उस्मानी तमांचे” की बात कही, क्योंकि अमरीकी जनरल ने धमकी दी थी कि अगर सीरिया में अमरीकी बल तुर्की सेना के हमले का शिकार हो हुए तो उनको अमरीकी प्रतिक्रिया से निपटना होगा। इसी प्रकार तुर्की की कट्टरपंथी राष्ट्रीय पार्टी के लीडर बहशतली ने भी अमरीका को धमकी दी है कि उन्होंने जो वियतनाम में देखा है उसका पाँच गुना अधिक बुरा अनुभव उनको यहां होने वाला है।

पुतिन सीरिया में अफगान परिदृष्य दोहराए जाने में रुकावट बनेंगे

लेकिन ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि पुतिन सीरिया में रूस बलों के लिए अफगानिस्तान के परिदृष्य को दोहराने दें, और वह महान उपलब्धि जो प्राप्त की है उसको ऐसे ही समाप्त हो जाने दें, विशेषकर तब जब कि वह शक्तिशाली क्षेत्रीय बल जैसे ईरान, तुर्की और हिज़्बुल्लाह के साथ गठबंधन किए हुए है, और सीरिया में रूसी हलों की उपस्थिति भी कानूनी है, क्योंकि वह सीरिया सरकार की मांग पर आए हैं, जब कि इसके उलट सीरिया मे अमरीका की उपस्थिति गैर कानूनी है।

अफगानिस्तान परिदृष्य का दोहराया जाना और अमरीका की अपमान जनक हार

इस बार यह अमरीका होगा जो इस जाल में फसेगा, और उसको इराक़ और सीरिया में इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी होगी, क्योकि इन दोनों देशों में अमरीकी सैन्य सलाहकारों के अतिरिक्त 8 हज़ार से अधिक अमरीकी सैनिक मौजूद हैं। और महत्वपूर्ण चीज़ यह है कि लीबिया और इराक़ में नेतृत्व परिवर्तन जैसी सीरिया में अमरीकी कोशिश विफल हो चुकी है और वह बशार असद को सत्ता से नहीं हटा सके हैं, और क्षेत्री की जनता में उनके विरुद्ध नफरत बढ़ी है और उनके नए सहयोगी कुर्द और पुराने दोस्त इस्राईल के विरुद्ध अमरीकी विदेश मंत्री का तुर्की का दौरा विफल रहा है और तुर्की के साथ उनका पुराना गठबंधन टूटने की कगार पर है। इस सभी चीज़ों को देखते हुए कहा जा सकता है कि कहीं ऐसा न हो कि ईरान, रूस और तुर्की नेताओं की बैठक में अमरीकी बलों के विरुद्ध एक प्रतिरोधी बल के गठन पर सहमति न बन जाए। बहरहाल युद्ध का ढोल बज रहा है, और अमरीका द्वारा दफ्न की गई शांति की कोई बात नहीं हो रही है, बल्कि आने वालों दिनों में संभव है कि और बड़ी घटनाएं हो जिनके मुकाबले में एफ-16 की गिराया जाना छोटा दिखाई देने लगे।

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