Tuesday, September 21, 2021

 

 

 

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन: रूस ने लगाया नए शीतयुद्ध का आरोप

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म्यूनिख। रूस के प्रधानमत्री दमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि दुनिया नए शीतयुद्ध में पहुंच गई है जबकि जर्मनी में चल रही विश्व नेताओं की बैठक पर सीरिया और यूक्रेन को लेकर पूर्व और पश्चिम के बीच तनाव का साया छाया रहा। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि रूस को सीरिया में उदार विद्रोहियों को निशाना बनाना रोक देना चाहिए और यूक्रेन से अपनी सेनाएं हटा लेनी चाहिए।

कैरी ने श्रोताओें से कहा कि आज की तारीख तक, (सीरिया में) रूस के ज्यादातर हमले वैध विपक्षी संगठनों के खिलाफ रहे हैं। कल के अंतरराष्ट्रीय समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रूस ने जो हामी भरी है, उसका पालन करने के लिए, उसके लक्ष्य बदलना चाहिए। शुक्रवार को विदेश मंत्रियों ने सीरिया में एक हफ्ते के अंदर युद्ध रोकने का प्रयास करने पर हामी भरी थी।

कैरी ने कहा कि यह पल है। यह मुख्य बिंदु है। आगामी दिनों, हफ्तों में और कुछ महीनों में होने वाले फैसलों से सीरिया में युद्ध समाप्त हो सकता है या भविष्य के लिए कड़े विकल्प आ सकते हैं। उन्होंने रूसी प्रधानमंत्री दमित्री मेदवेदेव के संबोधन के महज कुछ देर बाद अपनी बात रखी। मेदवेदेव ने दुनिया के शीतयुद्ध के नए काल में पहुंच जाने की बात कही थी।

मेदवेदेव ने कहा कि करीब करीब हर रोज हमपर नाटो या यूरोप या अमेरिका या अन्य देशों को भयावह धमकियां देने का आरोप लगाया जाता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने कहा कि हर रोज, रूसी सेनाएं, रूसी हथियार, रूसी आयुध मेरे देश में घुसते हैं। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति को उनकी गैरहाजिरी में संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमान् व्लादिमीर पुतिन, यूक्रेन में यह गृहयुद्ध नहीं है, यह आपका हमला है। क्रीमिया में गृहयुद्ध नहीं है। यह आपके सैनिक ही हैं जिन्होंने मेरे देश पर कब्जा कर लिया है। कैरी ने इस बात पर बल दिया कि रूस पर प्रतिबंध तबतक लगे रहेंगे जबतक वह पिछले साल बेलारूस की राजधानी मिंस्क में हुए शांति समझौते के सभी पहलुओं को नहीं लागू करता।

मेदवेदेव ने शीतयुद्ध के समापन के बाद पूर्व सोवियत संघ शासित पूर्वी यूरोप में नाटो के प्रसार और यूरोपीय संघ के बढ़ते प्रभाव की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोपीय नेता सोचते थे कि यूरोप के एक ओर यानी यूरोपीय संघ के बाहरी हिस्सों में मित्रों की तथाकथित मंडली बनाना सुरक्षा की गारंटी हो सकती है लेकिन नतीजा क्या है? मित्रों की मंडली नहीं बल्कि अलग थलग पड़ जाने वालों मंडली बन गई हालांकि उन्होंने सकारात्मक रुख भी प्रदर्शित किया और कहा कि हमारे रुख भिन्न है लेकिन 40 साल पहले जैसे नहीं। (ibnlive)

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