Saturday, November 27, 2021

यमन, रोहिंग्या सहित कई मुद्दों पर ईरानी राष्ट्रपति का संयुक्त राष्ट्र महासभा बैठक में विमर्श

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इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के अधिवेशन में भाग लेने के लिए न्यूयार्क गए हुए हैं जहां कई देशों के नेताओं से उनकी मुलाक़ातें हुईं।

डाक्टर हसन रूहानी नार्वे की प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग से मुलाक़ात में ईरान के साथ यूरोपीय संघ विशेष रूप से नार्वे के संबंधों के विस्तार का स्वागत किया और कहा कि परमाणु समझौते से ईरान और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों के विस्तार के लिए अनुकूल हालात पैदा हुए हैं।

डाक्टर हसन रूहानी ने कहा कि यह समझौता पूरी दुनिया के हित में है और दर्शाता है कि अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं को बातचीत से हल किया जा सकता है।

नार्वे की प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश परमाणु समझौते पर प्रतिबद्ध है और ईरान में पूंजीनिवेश के अवसरों से लाभ उठाने का इरादा रखता है। डाक्टर रूहानी की मुलाक़ात बुल्गारिया के राष्ट्रपति रुमेन रादेव से भी हुई।

इस मुलाक़ात में डाक्टर रूहानी ने कहा कि ईरान तेल व गैस का बड़ा भंडार अपने पास रखता है जिससे यूरोप की ज़रूरत पूरी हो सकती है और ईरान इस संबंध में बुलगारिया से सहयोग के लिए तैयार है।

राष्ट्रपति रूहानी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी से मुलाक़ात में कहा कि दोनों देशों के राष्ट्र आपस में घनिष्ट संबंध चाते है।

डाक्टर रूहानी ने सीमा की सुरक्षा पर ज़ोर देते हुए कहा कि पाकिस्तान के भीतर से आतंकी संगठन अगर संयुक्त सीमा पर हमले करेंगे तो यह दोनों देशों के संबंधों के लिए अच्छा नहीं होगा।

डाक्टर रूहानी ने न्यूयार्क में कई और बैठकों में भी हिस्सा लिया। अमरीका के अख़बार संपादकों और मीडिया कर्मियों से मुलाक़ात में डाक्टर रूहानी ने कहा कि यमन में जारी जनसंहार का कोई औचित्या नहीं है।

उन्होंने कहा कि यमन पर हमले बंद होना चाहिए, वहां की घेराबंदी ख़त्म होनी चाहिए जिसके बाद तत्काल मानवीय सहायता यमन भेजी जाए और यमनी पक्षों के बीच वार्ता शुरू करवाई जाए।

उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्रीय समास्याओं के समाधान में मदद करना चाहता है, इसी लिए जब ईरान से प्रत्यक्ष रूप से मदद मांगी जाती है तो ईरान मदद करता है। राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि इसी आधार पर ईरान ने आतंकवाद से लड़ाई में सीरिया और इराक़ की मदद की।

डाक्टर रूहानी ने इराक़ी कुर्दिस्तान में जनमत संग्रह के आयोजन के बारे में कहा कि इससे इराक़ ही नहीं पूरे क्षेत्र की शांति व सुरक्षा के लिए ख़तरे पैदा होंगे।

डाक्टर हसन रूहानी ने मंगलवार को म्यांमार के संबंध में ओआईसी के संपर्क ग्रुप से मुलाक़ात में कहा कि यदि रोहिंग्या मुसलमानों के अधिकारों की अनदेखी की गई तो इससे चरमपंथ को बढ़ावा मिलेगा।

डाक्टर हसन रूहानी ने कहा कि म्यांमार की सरकार को जान लेना चाहिए कि रोहिंग्या मुसलमानों को विस्थापित करके अन्य देशों में खदेड़ देना संकट के समाधान का रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के मानवाधिकारों और मानवीय प्रतिष्ठा व सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने वाले हर रास्ते से मदद करने के लिए तैयार है।

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