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जनरल कमर जावेद बाजवा

सऊदी अरब के नेतृत्व में बने मुस्लिम देशों के सैन्य गठबंधन की कमाना सँभाल रहा पाकिस्तान अब सऊदी अरब में अपने सैनिकों की नियुक्ति करने जा रहा है. इसकी घोषणा सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने की है.

पाकिस्तान में सऊदी के राजदूत नवाफ सईद अल-मलिकी के बीच बैठक के बाद बाजवा ने कहा, ‘पाकिस्तान-सऊदी द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को जारी रखते हुए पाकिस्तानी सेना के एक दल को ट्रेनिंग के लिए सऊदी अरब भेजा जा रहा है. इन सैनिकों को और वहां पहले से मौजूद सैनिकों को सऊदी अरब से बाहर तैनात नहीं किया जाएगा.’

ध्यान रहे सऊदी अरब 2015 से पाकिस्तान पर सैनिक भेजने का दबाव बना रहा है. लेकिन मध्य-पूर्व के किसी भी विवाद से ख़ास कर यमन युद्ध से बचने के लिए पाकिस्तान सऊदी की बात को किसी तरह टालता रहा.

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने उस वक्त कहा था कि उनका देश कभी भी यमन युद्ध में शामिल नहीं होगा और वह सऊदी गठजोड़ के संबंध में इस्लामी गणतंत्र ईरान की चिंताओं से अवगत है. उन्होंने कहा था कि सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन और इसकी कमान पाकिस्तान के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल राहील शरीफ़ को सौंपे जाने के बारे में ईरान ने जो चिंताएं पेश की हैं पाकिस्तान उन्हें दृष्टिगत रखेगा और उन चिंताओं को दूर कर देगा.

वहीँ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज ने कहा था कि यमन युद्ध में पाकिस्तान की सैन्य भागीदारी होती हैं तो उनके ही देश के शिया मुसलमानों के साथ उनकी टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी सेना यमन युद्ध में भाग लेती तो उसका सीधा अर्थ यह था कि उनके ही देश में दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले शिया मुसलमानों से सीधा टकराव.

उन्होंने कहा था कि वास्ताव में यह मतों की लड़ाई है जिसका उद्देश्य मुसलमानों के बीच फूट डालकर विभाजित करना हैं. उन्होंने कहा कि यमन युद्ध में भाग लेने का अर्थ यह है कि हम स्वयं पाकिस्तानी जनता के बीच युद्ध की चिंगारी भड़काएं इसलिए किसी भी तरह यह उचित नहीं है कि पाकिस्तान यमन युद्ध में भाग ले.

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