जनाब भारती शौकत

इन दिनों भारत और इजराइल के बीच संबंध बढते नज़र आ रहे है. इजराइल के मुख्यमंत्री बेनजामिन नेतान्याहू भारत का दौरा करने वाले है. 14 जनवरी को नेतान्याहू भारत के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे. मुलाकात में इजराइल और भारत के बढ़ते सम्बन्धों पर चर्चा की जाएगी.

लेकिन जैसा की हमने पिछले दिनों देखा की अमेरिका और इसराइल के खिलाफ पूरा विश्व एक खेमे में खड़ा नज़र आया.हालाँकि उसके बाद से गुस्से में आई ट्रम्प सरकार ‘देख लेने’ की धमकी पर पाकिस्तान जैसे कुछ देशों की सहायता राशि रोकने की जुगत में नज़र आ रही है. आज हम बात करवाने जा रहे है अन्तराष्ट्रीय मुद्दों को जानकार भारती शौकत साहब से, जिनकी मिडिल ईस्ट से सम्बंधित मामलों पर ना सिर्फ अच्छी पकड़ है बल्कि आगामी कुछ वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में क्या-क्या व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे, इस पर भी खुलकर चर्चा करते हुए नज़र आते है. कोहराम न्यूज़ से हुई बातचीत में उन्होंने काफी मुद्दों पर चर्चा की जिसके कुछ अंश नीचे मौजूद हैं.

प्रश्न: इजराइल से बढते सैन्य संबंध से भारत को क्या खतरा है?

उत्तर: इजराइल और भारत के बीच बढते सम्बन्ध से भारत सरकार का किसी भी तरह से कोई फायदा नहीं है. सैन्य संबंध से सिर्फ और सिर्फ इजराइल का ही फायदा होगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि हिंदुस्तान में शुरू से दो तरह की चीज़े बराबरी में चलती आई है एक सरकार थी वो प्रो-फिलिस्तीन रही है और बरबरी में आरएसएस का नेटवर्क जुड़ा था.  यह नेटवर्क अपनी विचारधारा को बढ़ाने का काम कर रहा था. अब मोदी सरकार आई है वो उसी फ़िक्र की सरकार आ गयी है. दरअसल इजराइल यह सब कुछ करके ‘ग्रेटर इजराइल’ बनाना चाहता है. अगर हम “ग्रेटर इजराइल” के झंडे को देखें तो उसमें एक सितारा बना हुआ है और दो नीली रेखाए बनी हुई है, यह रेखाएं पानी की लहरों को दर्शा रही है यानी दरया-ए-फरात से लेकर दरया-ए-नील तक “ग्रेटर इजराइल” बनाना चाहता है और इसका एलान खुलेआम किया गया है. ग्रेटर इजराइल में मदीने का एक बड़ा हिस्सा है इसी के साथ जॉर्डन,सीरिया, इराक का एक बड़ा हिस्सा शामिल है.

भारत को इस वक़्त पाकिस्तान से भी हमले का बड़ा खतरा नज़र आ रहा है. क्योंकि पाकिस्तान को इजराइल का साथी कहा जाने वाला सऊदी अरब पाकिस्तान को फण्ड दे रहा है. इजराइल भारत को खुलेआम इस्तेमाल कर रहा है. अगर हम येरुशलम मुद्दे की बात करें तो फिलिस्तीन के समर्थन में पूरी दुनिया के मुस्लिम एक तरफ थे और अमेरिका इजराइल एक तरफ है. अगर भारत ने वाकई फिलिस्तीन का समर्थन करता है तो वह इजराइल को 14 जनवरी को भारत क्यों बुला रहे है.

प्रश्न: अगर हिंदुस्तान भविष्य में इजराइल के साथ खड़ा हो जाता है तो एशिया में इसकी स्थिति पर क्या फर्क पड़ेगा?

उत्तर: इस वक़्त हिंदुस्तान को ISIS का खतरा बढ़ता हुआ नज़र आ रहा है. ISIS को हिंदुस्तान में एयरलिफ्ट अमेरिका और इजराइल के द्वारा ही किया जा रहा है. अमेरिका और इजराइल अपने हथियार किसी ना किसी तरह से आतंकवाद समूह को बेच रहे है. जिससे भी सिर्फ अमेरिका और इजराइल का फायदा होता हुआ नज़र आ रहा है. हिंदुस्तान को इजराइल के साथ खड़े होने पर भी आतंकी हमलों का डर सताएगा और कुछ नहीं. हिंदुस्तान में आये दिन हिन्दू-मुस्लिम के बीच पैदा हो रही नफरत का उदहारण देखने को मिलता रहता है यह सब इसी का नतीजा है. भारत में इस तरह का खून खराबा आगे भी बहुत ज्यादा देखने को मिल सकता है अगर हिंदुस्तान यूं ही आँख बंद करे हुए इजराइल और अमेरिका का साथ देता रहा. भारत पर यह बहुत बड़ा खतरा है. यह अशांति का माहौल सिर्फ उन्ही इलाकों में है जहाँ “ग्रेटर इजराइल” बनाया जाएगा जैसे कि जॉर्डन, सीरिया, इराक, आदि. अफगानिस्तान में ISIS की दखलंदाजी बढती ही जारी है इसके पीछे भी अमेरिका और इजराइल का हाथ है. इजराइल को अपना “डिवाइड एंड रूल” फार्मूला पूरा करना जिसके लिए वो किसी भी हद्द तक जा सकता है. हिंदुस्तान में हिन्दू-मुस्लिम का विवाद इसका सबसे बड़ा उदहारण है. अमेरिका काम सिर्फ हिंदुस्तान के हिन्दू-मुस्लिम को बाटने करने का है, इसलिए हर कोई अमेरिका और इजराइल से खुद को बचाने की कर रहे है.

प्रश्न: इजराइल के साथ अच्छे संबंध रखने पर भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर की असर पड़ेगा?

उत्तर: इस कदम से पाकिस्तान को मज़बूत बनाया जा रहा है. इस वजह यह है कि जो बैतूल मुकद्दस से सभी मुसलमानों की भावनाएं जुड़ी हुई है और इजराइल इसे  खत्म करने की तैयारी में लगा हुआ है. OIC के बैठक हुई जिसमें तमाम मुस्लिम देश एक तरफ खड़े हो गए अगर अब इसे में भारत इजराइल के साथ अच्छे संबंध बनता है तो यह तमाम देश पाकिस्तान की तरफ खड़े हो जाएँगे और उन देशों के साथ चीन के संबंध बहुत अच्छे है. चाइना और पाकिस्तान के संबंध भी बहुत अच्छे है. अमेरिका और इजराइल इन सभी देशों से रिश्ते अच्छे नहीं है और अब रूस से भी संबंध खराब होते जा रहे है तो अब यह सवाल उठता है अब इन्हें बचाने कौन आएगा? तो इस से  साफ़ ज़ाहिर होता है कि हिंदुस्तान अगर इजराइल के साथ अच्छे संबंध बनाया है तो इससे यह साबित होगा कि भारत अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मार रहा है और यह देश के बहुत खराब स्थति हो सकती है. एक वक़्त आएगा जब पाकिस्तान भी फिलिस्तीन के साथ खड़ा होगा क्योंकि पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध खराब होते हुए नज़र आ रहे है. अमेरिका ने पाकिस्तान पर सहायता राशि देने से भी रोक लगा दी है. इस वक़्त पाकिस्तान को सहायता राशि की ज़रूरत जो वह अमेरिका से ना लेकर रूस से ले सकता है क्योंकि रूस और पाकिस्तान के संबंध पहले से ही अच्छे रहे है. नुक्लेअर  पॉवर भी सिर्फ एक ही इस्लामिक देश के पास है और वो है पाकिस्तान. अगर भविष्य में अगर इजराइल के खिलाफ लड़ाई हुई तो पाकिस्तान की अहमियत और भी ज्यादा हो जाएगी. इस स्थिति में पाकिस्तान का साथ देने सभी मुस्लिम देश आ जाएँगे. तो सब बातों से पता चलता है कि भारत यह सब करके अपने दुश्मन देश पाकिस्तान को मज़बूत बना रहा है.

प्रश्न: उन देशों का क्या हुआ है जिनके इजराइल के साथ अच्छे संबंध थे, अब उनके मौजूदा हालात कैसे है?

उत्तर: सऊदी अरब, ज़्यादातर अरब देशों, लेबनान सभी से बहुत अच्छे संबंध है. लेबनान और जॉर्डन के इजराइल के साथ अच्छे संबंध रखे थे और उनका हाल सब जानते है. OIC की मीटिंग में सभी मुस्लिम देश एकजुट हो गए थे. सऊदी अरब इतना साथ तो दे रहे है. लेकिन सऊदी अरब की इस वक़्त हालत की है यह सब जानते है. इजराइल को कोई भी देश पसंद नहीं कर रहा है. इजराइल और अमेरिका का साथ देना वाला कोई  भी देश नहीं बचा है. ट्रम्प के येरुशलम फैसले से एक बहुत अच्छी चीज़ सामने आई है और वो है “एकजुटता.” ट्रम्प के फैसले ने दुनिया भर के मुसलमानों को एकजुट कर दिया है और आने वाले वक़्त में हालत ऐसे पैदा होंगे कि पूरी दुनिया एक तरह होगी और अमेरिका और इजराइल एक तरफ.

(लेखक परिचय: World Wasila Front Organisation से जुड़े है. फ्रीलांसर है मिडिल ईस्ट तथा अरब देशों से जुड़े मुद्दों पर अच्छी पकड़ है. इसी के साथ यह शिया और सुन्नी को आपस में जोड़ने के लिए कार्य करते है .कई टीवी चैनल डिबेट में भी अपना पक्ष रख चुके है.)

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