संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने पहली बार संयुक्त रूप से सऊदी अरब में महिलाओं पर अत्याचार और महिला अधिकारों की मांग करने वाली सभी महिलाओं को मुक्त किए जाने की मांग की है.

सन् 2006 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की स्थापना के बाद यह पहला मौक़ा है जब सऊदी शाही परिवार के ख़िलाफ़ सभी 36 सदस्य देशों ने एक बयान जारी कर संयुक्त रूप से आवाज़ उठाई है.बयान में कहा गया है कि आंदोलनकारी महिलाओं के साथ मारपीट और शोषण किए जाने की वारदातें सामने आ रही हैं.

महिला अधिकारों के लिए सतत प्रयत्नशील कनाडा सरकार से साऊदी प्रशासन ने सम्बंध ख़त्म कर दिए गए हैं. सऊदी प्रशासन ने महिला आंदोलनकारियों को यातनाएं देने से इनकार किया है लेकिन महिला अधिकारों की मांग करने वाली महिलाओं को छोड़े जाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की है.

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इन देशों में यूरोपीय संघ के सदस्यों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, आइसलैंड, न्यूजीलैंड, मोनाको, नॉर्वे और कनाडा शामिल हैं. दरअसल, सऊदी सरकार ने महिलाओं के अधिकार के लिए आवाज उठाने वाली कई कार्यकर्ताओं पर मुकदमा चलाकर उन्हें जेल में डाल दिया है.

मीडिया के इन महिलाओं तक पहुंचने पर भी प्रतिबंध लगा रखा है. इस बैठक में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या में सऊदी प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की संलिप्तता की बात भी उठी.

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