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इस्लामाबाद । पाकिस्तान में एक छोटे से इस्लामिक संगठन के प्रदर्शन ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी की रफ़्तार को थाम दिया। क़रीब 20 दिन से चल रहे उनके प्रदर्शन की वजह से दोनो ही शहरों में आवागम बिलकुल ठप्प हो गया जिसकी वजह से सरकार को बल पूर्वक प्रदर्शनकारियो को खदेड़ना पड़ा। इससे हालात और बिगड़ गए और सुरक्षाबलों के साथ प्रदर्शनकारियो की झड़प हो गयी।

ख़बर लिखे जाने तक इस्लामाबाद में हालात बद से बदतर हो चुके थे। प्रदर्शनकारियो के साथ हुई झड़प में एक पुलिस कर्मी की मौत हो गयी जबकि 100 से ज़्यादा लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनो को आग के हवाले कर दिया। उधर सरकार ने एतिहात के तौर पर स्थानीय टीवी चैनल द्वारा घटनास्थल का सीधा प्रसारण दिखाने पर रोक लगा दी। उधर पाकिस्तान के दक्षिण पश्चिमी शहर क्वेटा में एक बम विस्फोट होने की ख़बर है जिसमें 4 लोगों की मौत हो गयी।

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मिली जानकारी के अनुसार 6 नवम्बर को तहरीक-ए-लब्बैक (टीएलपी) या रसूल अल्लाह नाम के इस्लामिक संगठन ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी में संघीय और प्रांतीय कानून मंत्री जाहिद हमीद और राणा सनाउल्लाह के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया था। धीरे धीरे इस विरोध प्रदर्शन के साथ लोग जुड़ने लगे। एएफपी के अनुसार पहले यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था लेकिन अब इन्होंने मुख्य हाइवे को ब्लाक कर दिया जिसकी वजह से आवागमन ठप्प हो गया।

इसलिए शुक्रवार रात को इस्लामाबाद पुलिस और फ्रंटियर कांस्टेबुलरी (एफसी) के क़रीब 8500 सुरक्षाबलों ने 2000 प्रदर्शनकारियो को खदेड़ना शुरू कर दिया। लेकिन शनिवार सुबह ये फिर एकत्रित हो गए। इस दौरान वहाँ हिंसा भड़क उठी। हिंसा में एक पुलिस कर्मी की मौत हो गयी। जबकि कई वाहनो को आग लगा दी गयी। इस हिंसा में 100 लोगों के घायल होने की भी ख़बर है। हालाँकि सरकार का कहना है की 67 लोगों को मामूली चोटें आयी है।

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