लन्दन | पिछले काफी महीनो से दुनियाभर से हिजाब पहनने को लेकर काफी खबरे आ रही है. अमेरिका से लेकर न्यूजीलैंड तक, हिजाब पहनने को लेकर मुस्लिम महिलाओं को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. इन मामलो में ज्यादातर ऐसे मामले है जिनमे कम्पनी के नियमो के मुताबिक हिजाब नही पहना जा सकता जबकि कुछ मामले संप्रदायिक है. एक ऐसे ही मामले में यूरोपियन कोर्ट ने एक चौकाने वाला फैसला दिया है.

यूरोपियन कोर्ट ऑफ जस्टिस ने मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा की हिजाब पहनने पर कोई भी कंपनी, कर्मचारी को अपने यहाँ काम करने से रोक सकती है. इस बात को सीधा भेदभाव नही माना जा सकता. दरअसल यूरोपियन कोर्ट से बेल्जियम और फ्रांस की दो महिलाओं ने न्याय की मांग करते हुए कहा था की उनको केवल इस आधार पर नौकरी से निकाल दिया गया क्योकि उन्होंने हिजाब उतारने से मना कर दिया था.

याचिकाकर्ताओ ने इसे भेदभाव की संज्ञा देते हुए वापिस नौकरी पर रखने की मांग की थी. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा की किसी कंपनी का अंदरूनी नियम जो किसी भी राजनीतिक , दार्शनिक और धार्मिक संकेत को पहनने पर रोक लगाता हो, उसे सीधा भेदभाव से नही जोड़ा सकता. इसलिए कंपनी के नियम के मुताबिक कर्मचारी ऐसा कोई भी संकेत पहनकर नही आ सकता जो किसी भी धर्म से जुड़ा हो और साफ़ तौर पर दिख रहा हो.

हालाँकि अदालत ने कस्टमर की इच्छा पर किसी को हिजाब पहनने से रोकने पर कहा की कोई भी कंपनी कस्टमर की इच्छा पर ऐसे फैसले नही दे सकती. मालूम हो की पूरी दुनिया में हिजाब को लेकर बहस छिड़ी हुई है. काफी कंपनी हिजाब को एक विशेष समुदाय से जोड़कर उसको धार्मिक चिन्ह के तौर पर मानती है. इसलिए ऐसे बहुत से मामले देखने में आये है जिसमे कंपनी ने खासकर मुस्लिम महिला को हिजाब उतारकर आने का निर्देश दिया और ऐसा नही करने पर उसको नौकरी से निकाल दिया गया.

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