बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉक्टर एके अब्दुल मोमिन ने नागरिकता संशोधन बिल पर गृहमंत्री अमित शाह की और से बांग्लादेश को लेकर की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताई है।

उन्होने कहा, “दुनिया में कुछ ही ऐसे देश हैं जहां सांप्रदायिक सौहार्द होता है, बांग्लादेश उन्हीं कुछ देशों में से एक है। अगर भारत के गृहमंत्री अमित शाह कुछ महीने बांग्लादेश में गुजारें तो वो हमारे देश के सांप्रदायिक सौहार्द को देख सकते हैं।”

बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने भारत का जिक्र करते हुए कहा- “भारत की अपने देश में ही कई समस्याएं होंगी। उन्हें उन समस्याओं से लड़ने दीजिए। उससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। एक मित्र देश होने के नाते हमें उम्मीद है कि भारत कुछ भी ऐसा नहीं करेगा, जिससे हमारी दोस्ती पर असर पड़े।”

इसके अलावा ढाका के एक ऑनलाइन अख़बार बांग्ला ट्रिब्यून में 11 दिसंबर को विदेश मंत्री का एक और बयान छपा है। जिसमे उन्होने कहा है कि धर्म के आधार पर नागरिकता के इस क़ानून से भारत का सेक्युलर स्टैंड कमज़ोर होगा। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक तौर पर भारत एक सहिष्णु देश रहा है। उन्होंने कहा कि अगर भारत उससे हटता है तो उसकी ऐतिहासिक पहचान कमज़ोर होगी।

बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह ने 9 दिसंबर को संसद में कहा था कि बांग्लादेश में हिंदू अपनी धार्मिक गतिविधियां नहीं कर पाते हैं। अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि 1947 में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की संख्या 22 फीसदी थी और 2011 में यह कम होकर 7.8 फीसदी रह गई जबकि बांग्लादेश 1971 में बना, 1947 से 1971 के बीच वो पूर्वी पाकिस्तान था।

उन्होंने ये भी कहा कि 1971 में बांग्लादेश को संविधान में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र माना गया था लेकिन उसके बाद 1977 में राज्य का धर्म इस्लाम माना गया।

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