भारत में नोटबंदी को ‘बड़ी असफलता’ करार देते हुए चीन के प्रमुख अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स ने अपने संपादकीय में कहा कि नोटबंदी के कारण दुर्भाग्‍य से भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 10 साल पीछे पहुँच गई.

संपादकीय में कहा गया कि 8 नवंबर को मोदी द्वारा 500 और 1,000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा ‘बेघर लोगों को एक महीने के समय में मंगल पर घर देने जैसे वादे’ जैसी थी. जो एक बड़ी असफलता के रूप में सामने आई है. इसके कारण भारत की अर्थव्यवस्था करीब एक दशक पीछे पहुँच गई हैं.

अखबार ने लिखा, ”दुर्भाग्‍य से, वास्‍तविकता यह है कि नोटबंदी ने भारतीय अर्थव्‍यवथा को कम से कम एक दशक पीछे ढकेल दिया है, जिससे नौकरियां कम हो रही हैं. इसके साथ ही अख़बार ने नोटबंदी के कारण हुई परेशानियों का भी जिक्र किया.

अखबार ने लिखा है कि नोटबंदी के बाद से देश की 86 फीसदी करंसी अवैध हो गई थी जिसके बाद नकदी का अभूतपूर्व संकट देखने को मिला था. इस फैसले से बुजुर्ग नागरिकों को गंभीर मानसिक और शारीरिक कष्‍ट झेलना पड़ा जिन्‍होंने बैंक की कतारों में घंटों बिताए, उनमें से कुछ की मौत भी हो गई.

डिजिटल लेनदेन पर सवाल उठाते हुए कहा कि ”बिना आधारभूत संरचना तैयार किए भारत कैसे रातोंरात कैश आधारित अर्थव्‍यवस्‍था से डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था में बदल सकता है?” इसके साथ ही अखबार ने कहा कि नोटबंदी से सिर्फ भ्रष्‍टाचार बढ़ा है.


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