म्यांमार के राखिने में रोहिंग्या मुस्लिमों के नरसंहार के मामले में देश की सर्व्वोच नेता आंग सान सु की और सैन्य बलों के प्रमुख जेन आंग मिन हाइंग पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा चल सकता है.

संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकारों के उच्च आयुक्त अल-हुसैन ने कहा कि भविष्य में वह इस संभावना से इनकार नहीं कर सकते कि इन दोनों को रोहिंग्या नरसंहार के आरोपों में कटघरे में खड़े किया जा सकता हैं.

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ध्यान रहे सयुंक्त राष्ट्र म्यांमार में सैन्य अभियान को नरसंहार का नाम पहले ही दे चूका है. साथ ही कई बार म्यांमार सरकार और आंग सान सु की को चेतावनी भी जारी कर चूका है.

इसी बीच ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने दावा किया है कि अक्टूबर से नवंबर के बीच जारी सैन्य अभियान में फिर से राखिने में हिंसा के दौरान 40 रोहिंग्या गांव जला दिए गए.

एचआरडब्ल्यू एशिया के निदेशक ब्रैड एडम्स ने कहा कि रोहिंग्या गांवों को निरंतर खत्म किए जाने से पता चलता है कि निर्वासित शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता केवल एक दिखावा था.

एडम्स ने कहा, ‘उपग्रह की तस्वीरों से पता चलता है कि रोहिंग्या के गांवों को लगातार नष्ट किया जा रहा है, जिसे म्यांमार सेना खारिज कर रही है. म्यांमार सरकार ने शरणार्थियों की वापसी की प्रतिबद्धता को गंभीरता से नहीं लिया है.