ब्रिटिश पीएम ने जलियांवाला बाग कांड के लिए जताया दुख,, कहा – ब्रिटिशकालीन इतिहास पर शर्मनाक धब्बा

11:31 am Published by:-Hindi News

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के पर्व पर पंजाब में अमृतसर के जलियांवाला बाग में ब्रिटिश हुकूमत में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर के आदेश पर निहत्थे बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को गोलियों से भून दिया गया था। इस हत्याकांड के 100 साल पूरे होने वाले है।

ऐसे में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने जलियावालां बाग नरसंहार पर खेद जताया है। थेरेसा ने बुधवार को संसद के सामने कहा कि उन्हें इस घटना और इससे पैदा हुए कष्टों पर गहरा दुख है। हालांकि, इस दौरान उन्होंने एक भी बार माफी नहीं मांगी। इस पर संसद में विपक्ष के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने थेरेसा से साफ, स्पष्ट और विस्तृत माफी मांगने के लिए कहा।

टरीजा ने बयान जारी कर कहा, ‘जो हुआ और जो त्रासदी झेलनी पड़ी उसपर हमें अफसोस है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘ 1919 की जालियांवाल बाग त्रासदी ब्रिटिश-भारतीय इतिहास के लिए शर्मनाक धब्बा है। जैसा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1997 में जालियांवाला बाग जाने से पहले कहा था कि यह भारत के साथ हमारे बीते हुए इतिहास का दुखद उदाहरण है।’

बता दें कि इससे पहले 2013 में तत्कालीन पीएम डेविड कैमरन ने भारत दौरे पर 100 पुरानी इस त्रासदी को ‘बेहद शर्मनाक’ करार दिया था। लेकिन उन्होंने भी टरीजा की तरह घटना पर माफी नहीं मांगी थी। बताते चलें कि एक दिन पहले ही मंगलवार को औपचारिक माफी की मांग को लेकर ब्रिटिश सरकार ने इस पर विचार करने के लिए वित्तीय मुश्किलों के तथ्य को भी ध्यान में रखने को कहा था।

ब्रिटिश विदेश मंत्री मार्क फील्ड ने घटना पर हाउस ऑफ कामंस परिसर के वेस्टमिंस्टर हॉल में आयोजित बहस में भाग लेते हुए कहा कि हमें उन बातों की एक सीमा रेखा खींचनी होगी जो इतिहास का शर्मनाक हिस्सा हैं।

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