लंदन:  ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे को ब्रेक्सिट मामले में एक बार फिर बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. ब्रिटेन की संसद ने ब्रेक्सिट समझौते पर थेरेसा मे के मसौदे को दूसरी बार खारिज कर दिया है. समझौते का मसौदा अस्वीकार किए जाने के बाद देश के यूरोपीय संघ से अलग होने यानी ब्रेक्सिट को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है.

हाउस ऑफ कॉमन्स में इस डील को लेकर वोटिंग हुई और ब्रिटेन प्रधानमंत्री थेरेसा मे के खिलाफ वोटिंग हुई. प्रधानमंत्री के प्रस्ताव के खिलाफ वोट डाले। प्रस्ताव के खिलाफ 303 और पक्ष में 258 वोट पड़े. एक ब्रिटिश सांसद ने कहा कि वह यूरोपीय संघ के साथ वार्ता को लेकर पीएम के दृष्टिकोण को नहीं बदलेगा.

ब्रिटेन को 29 मार्च को यूरोपीय संघ से अलग होना है. नवीनतम मतदान में मिली हार के बाद ब्रिटेन के ईयू से बिना किसी समझौते के ही अलग होने की आशंका के बादल मंडराने लगे हैं. मतदान के बाद अपने संक्षिप्त संबोधन में थेरेसा मे ने सांसदों से कहा, ‘इस सदन ने जो फैसला लिया है, उस पर मुझे गहरा खेद है.’

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उन्होंने कहा, ‘ब्रिटेन के सामने जो विकल्प थे, वे अवांछनीय थे, लेकिन उनका समझौता खारिज होने के बाद जो विकल्प बचे हैं उनका सामना करना ही होगा.’ वहीं, यूरोपीय संघ की प्रमुख ब्रेक्जिट वार्ताकार मिशेल बार्नियर ने यही बात दोहराते हुए कहा कि ब्रसेल्स इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता.

यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जीन क्लाउड जंकर की प्रवक्ता ने उनके हवाले से कहा कि अब इसका हल लंदन में ही निकलेगा क्योंकि यूरोपीय संघ इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता है. यूरोपीय संघ के राजदूतों की बैठक बुधवार की सुबह में ब्रसेल्स में होगी.

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