एक ब्रिटिश सांसद ने यमन में जारी मानव त्रासदी और गंभीर मानवीय स्थिति में अपने देश की भूमिका की तरफ़ इशारा करते हुए उनकी भुखमरी को समाप्त किए जाने की मांग की है।

एंड्रयू मिशेल ने रविवार को इंडिपेंडेट समाचार पत्र में एक नोट  लिखा, ब्रिटेन के चैरेटी संगठन कोशिश कर रहे हैं कि ब्रिटिश लोगों के पैसे से ख़रीदे गए खाद्य पदार्थ और मेडिकल सामान और दूसरी आधारभूत चीज़ों को यमन पहुंचा सकें, जब कि सऊदी अरब के नेतृत्व वाले आक्रमणकारी गठबंधन ने ब्रिटिश सहयोग से उन बंदरगाहों को बंद कर रखा है जहां से यह सामान यमन पहुँचाया जाना है।

उन्होंने कहाः लगातार घटने वाली राजनीतिक घटनाओं ने यमन को धीरे धीरे भुखमरी और अकाल की तरफ़ ढकेल दिया है और हम उससे अनजान रहे। यमन का अकाल दूसरे अकालों से भिन्न है क्योंकि यह इंसानों द्वारा पैदा किया गया है, वास्तव में यमनियों को अकाल ने नहीं घेरा है बल्कि वह इन आक्रमणकारियों के कारण भुखमरी का शिकार है और ब्रिटेन भी अपनी राजनीतिक नीतियों के कारण इस भुखमरी को आगे बढ़ा रहा है।

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इस सांसद ने कहाः चैरेटी संगठनों और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि बंदर अलहदीदा तक संघर्ष पहुँचने का गंभीर परिणाम होगा, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में यमन की ज़रूरत की 80 प्रतिशत आयातित सामग्री और 90 प्रतिशत खाद्य सामग्री इस बंदरगाह से आती है।

एंड्रयू मिशेल का मानना है कि यमन में भुखमरी का बढ़ना ब्रिटेन और सऊदी अरब के हित में नहीं है, और इस देश में युद्ध सही दिशा में नहीं जा रहा है, और यह दुनिया में ब्रिटिश हितों को नुक़सान पहुँचा रहा है।

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