ईमान ही दौलत है इस कहावत को चरितार्थ किया है मिस्र के नागरिक ने. हज के लिए सऊदी अरब पहुँचे मिस्री नागरिक को हज के दौरान नोटों और सोने के गहनों से भरा एक बैग मिला. लेकिन उन्होंने बिना किसी लालच के बैग को लौटा दिया.

लुत्फी मोहम्मद अब्दुल करीम नामक ये शख्स हज के अरकानों की अदायगी के दौरान जामरात के पास रामी एकत्रित करने पहुंचे थे. वहां एकत्रित करते हुए अचानक उनकी नजर एक बैग पर पढ़ी. यह कैश और गहनों से भरा हुआ था. आसपास बैग के कोई था भी नहीं.

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लुत्फी ने बैग खोलकर देखा, तो उसमे उन्हें एक पहचान पत्र मिला. पहचान पत्र से उन्हें पता चला कि बैग नाइजीरियाई महिला का है. उन्होंने उस महिला को मौके पर तलाशा लेकिन वह नहीं मिल सकी. उन्होंने बैग को सुरक्षाकर्मियों को सौप दिया.

लुत्फी सऊदी शाह की और से बतौर मेहमान हज पर आए थे. दरअसल लुत्फी उन शहीद परिजनों के परिवारों में से एक है. जिन्हें सऊदी शाह ने हज के लिए चुना था. लुत्फी की इस ईमानदारी पर सऊदी हुकूमत ने उन्हें सम्मानित किया.

कार्यक्रम की शरीयत समिति के सदस्य अहमद जेलन ने अब्दुलकरीम के प्रयासों और नैतिकता की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि उन्होंने दूसरों के लिए भी एक बढ़िया उदाहरण दिया है. ऐसा कौन होगा जो बैग के मालिक की खोज करने की परेशानी झेले?

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