म्यांमार में हिंसा के चलते रोहिंग्या मुस्लिमों का लगातार पलायन जारी है. ऐसे में बांग्लादेश ने भारत सहित पड़ोसी देशों को आगाह करते हुए कहा कि अगर ये पलायन नहीं रुका तो पुरे क्षेत्र के लिए एक गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा.

बांग्लादेश के राजदूत सईद मौज्जम अली ने कहा कि बांग्लादेश भारत को एक रीजनल पावर के रूप में देख रहा है. जो रोहिंग्या मुस्लिमों के पलायन को रोकने और उनकी वापस स्वदेश वापसी में बड़ी भूमिका निभा सकता है. उन्होंने कहा, मैं अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा चिंतित हूं, लेकिन कहीं और रोहिंग्या शरणार्थियों की मौजूदगी सभी के लिए सुरक्षा जोखिम हो सकती है.

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राजदूत ने बताया कि जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश और पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा जैसे समूहों ने अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी के साथ संबंध स्थापित कर लिए थे. विभिन्न संगठन इस क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. हम पिछले चार दशकों से इस पर काम कर रहे हैं.

ध्यान रहे पिछले दो दशकों में बांग्लादेश में लगभग 4,00,000 रोहिंग्या मुसलमान पहले ही शरण लिए हुए है. अब इनकी संख्या दुगुनी हो गई है. इस संख्या का लगातार बड़ने का सिलसिला जारी है.

ऐसे में अब बांग्लादेश को भारत से उम्मीद है कि वह रोहिंग्या मुस्लिमों की इस गंभीर समस्या को सुलझाने में बड़ी मदद कर सकता है.

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