भारत में जहां अल्पसंखयक मुस्लिम समुदाय से जुड़े एतिहासिक स्थलों के नाम बदला जा रहा है तो वहीं दूसरी और पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में हिंदुओं को मंदिर के लिए करोड़ों की जमीन सरकार की और से दी जा रही है।

बांग्लादेश की प्रधानमन्त्री शेख हसीना ने ढाका में दुर्गा पूजा कार्यक्रम के दौरान देश के सबसे बड़े मंदिर ढाकेश्वरी मंदिर जाकर इस बात की घोषणा की। उन्होंने ढाकेश्वरी मंदिर के इर्द-गिर्द करीब ढाई बीघा जमीन भेंट में दी है। इस जमीन की कीमत करीब 43 करोड़ रूपये बताई जा रही है। बांग्लादेश पूजा उदजापोन परिषद ने इस कदम के लिए शेख हसीना को धन्यवाद दिया है।

शेख हसीना सोमवार को बांग्लादेश के सबसे बड़े मंदिर ढाकेश्वरी पहुंचीं। इसी दौरान उन्होंने मंदिर को करीब 50 करोड़ टका (43 करोड़ रुपये) की कीमत की जमीन देने की घोषणा की। ढाका का नाम भी ढाकेश्वरी देवी के नाम पर है।

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बांग्लादेश सरकार ने कहा, ‘बांग्लादेश में आवामी लीग के शासन ने सिर्फ विकास ही किया है। बीती एक शताब्दी से देश में इसका इंतजार था।’ उन्होंने कहा, ‘ देश में बेहतर सुरक्षा व्सवस्था के चलते ही न सिर्फ अल्पसंख्यक बल्कि पूरे देश के लोग सुरक्षित महसूस करते हैं।’

इसके अलावा बांग्लादेश की सरकार ने ‘हिन्दू कल्याण ट्रस्ट’ का फण्ड 21 करोड़ टका से बढ़ाकर 100 करोड़ टका दर दिया है। शेख हसीना ने कहा कि उनकी सरकार ने विभिन्न धर्म के लोगों के बीच सद्भाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की कोशिश की है और आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता अपनाई है।

इतिहासकारों के मुताबिक, ढाकेश्वरी मंदिर 12 वीं शताब्दी में शिव वंश के राजा बलाल सेन ने बनावाया था, और कहा जाता है कि शहर का नाम देवी के नाम पर रखा गया था। ढाकेश्वरी मंदिर राज्य के स्वामित्व वाला मंदिर है। इसे बांग्लादेश के ‘राष्ट्रीय मंदिर’ होने का गौरव प्राप्त है।

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