मानवाधिकार समूहों के विरोध के बावजूद बांग्लादेश ने 1,400 से अधिक रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को बंगाल की खाड़ी में एक दूरदराज के द्वीप पर स्थानांतरित कर दिया। बता दें कि तूफान और बाढ़ को लेकर मानवाधिकार समूहों ने चिंता जताई थी।

शुक्रवार को स्थानांतरित किए गया समूह उन लगभग 6,700 रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या में शामिल है जो बांग्लादेश से दिसंबर में ही भासन द्वीप के द्वीप में चले गए हैं। बांग्लादेश ने कहा कि शनिवार को होने वाला स्थानांतरण, स्वैच्छिक था, लेकिन शरणार्थियों के पहले समूह में से कुछ को स्थानांतरित कर दिया गया था जिनके साथ जबरदस्ती की जा रही थी।

सरकार ने यह भी कहा कि कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविरों में भीड़ होने से अपराधों में इजाफा हो रहा है। द्वीप के अधिकारी नेवी कमोडोर अब्दुल्ला अल मामून चौधरी ने टेलीफोन के जरिए बताया कि इस बार हमें दो दिनों में कुल 3,242 रोहिंग्या मिले हैं। हर कोई यहां की व्यवस्था से खुश है।

उन्होने कहा, शनिवार को पांच जहाजों ने 1,466 रोहिंग्या और उनके सामानों को स्थानांतरित कर दिया, क्योंकि उन्हें शिविरों से चटगांव में स्थानांतरित किया गया था। ढाका सरकार रामशकल सीमा शिविरों में रहने वाले 1 मिलियन शरणार्थियों के 10 प्रतिशत को स्थानांतरित करना चाहती है।

अपने परिवारों के साथ शुक्रवार को चले गए दो रोहिंग्या शरणार्थियों ने रायटर को बताया कि शिविरों में लगातार हिंसा ने  स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया था। 28 साल के एक शरणार्थी ने कहा, “हम डर में जी रहे हैं … हाल के दिनों में लगभग हर रोज आग लगने और हथियारों से लैस रोहिंग्या समूहों के वर्चस्व पर हमला होता है।”