93872761 rohingya

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ढाका | म्यांमार में चल रही हिंसा के बीच बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश और भारत में शरण लेने के लिए मजबूर है. ऐसे में करीब 6 लाख रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश में शरण ले चुके है. इतनी बड़ी संख्या में शर्णार्थियो के होने से बांग्लादेश सरकार को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. सरकार अभी भी शर्णार्थियो के लिए खाना और साफ़ पीने के पानी की व्यवस्था करने में मुश्किलों का सामना कर रही है.

इसलिए बांग्लादेश सरकार रोहिंग्या शर्णार्थियो की बढती आबादी पर रोक लगाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. बताया जा रहा है की कैंपो में रह रहे शरणार्थी परिवार नियोजन के तरीको से अनभिज्ञ है. इसके अलावा वो गरभनिरोधक के तरीको को भी अपनाना नही चाहते. इसकी सबसे बड़ी वजह उनका अशिक्षित होना बताया जा रहा है. जनसँख्या वृद्धि को रोकने के लिए सरकार की और से शरणार्थी कैंपो में कंडोम के पैकेट बांटे गए थे.

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लेकिन इसका कोई ख़ास असर नही दिखाई दिया. इसके अलावा महिलाओ को गरभनिरोधक दवाई भी दी गयी लेकिन यह भी विफल हो गयी. जिस जगह पर ये कैंप लगे है उस जिले के फैमिली प्लानिंग सर्विस के प्रमुख पिंटू कांती भट्टाचार्जी ने एएफपी से बात करते हुए कहा की रोहिंग्या में बड़े परिवार होना आम बात है.  यहाँ एक परिवार में 19 बच्चे है तो किसी परिवार में एक से ज्यादा पत्निया. इसकी एक बड़ी वजह इनका अशिक्षित होना है. ये लोग जनसँख्या नियंत्रण के प्रति बिलकुल भी जागरूक नही है.

भट्टाचार्य ने आगे कहा की हमने कैंपो में जनसँख्या नियनत्रण करने के लिए कंडोम के पैकेट बंटवाये थे लेकिन ये लोग इसके लिए इच्छुक नही दिखे. क्योकि जिन कैंपो में खाने पीने की चीजो का आभाव है वहां ज्यादा बच्चे परिवार की मदद कर सकते है. इसलिए हमने सरकार से रोहिंग्या पुरुषो और महिलाओ की नसबंदी करने की इजाजत मांगी है. हालाँकि हमें पता है की इसके लिए भी हमें संघर्ष करना पड़ सकता है.

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