सऊदी समाचार पत्र लेखक जमाल खाशक़जी ने ईलाफ़ साइट पर अपने नए लेख में दावा किया है कि फ़ारस की खाड़ी के दौरे पर गए तुर्की के राष्ट्रपति ने बहरीन के बादशाह से मुलाक़ात की और उनसे रियाज़ का धमकी भरा संदेश प्राप्त किया है। इस लेखक के अनुसार बहरीन के बादशाह और उर्दोग़ान ने मीडिया के सामने आधिकारिक मुलाक़ात के बाद लगभग 4 घंटे तक बंद द्वार के पीछे ग़ैर आधिकारिक बातचीत की है।

सऊदी अरब के शाही ख़ानदान के क़रीबी और अलअरब चैनल के प्रमुख जमाल ने दावा किया है कि मलिक हम्द ने सऊदी बाहशाह की तरफ़ से आंकारा और मास्कों के बीच बढ़ती नज़दीकियों पर रोष प्रकट करते हुए कहा कि उर्दोग़ान सरकार ने तुर्की को सऊदी अरब की लाखों डॉलर की सहायता की अनदेखी करते हुए सीरिया मामले से सऊदी अरब को हटा कर अपने अरब सहयोगी की पीठ में छुरा घोंपा है।
जमाल ने अपने लेख में लिखा है कि सऊदी अरब आंकारा और अपने ऐतिहासिक शत्रु रूस के बीच बढ़ते राजनीतिक और सैनिक संबंधों को प्रतिकूल मानता है। क्योंकि रूस, तुर्की, ईरान और सीरिया का चतुर्भुज मध्यपूर्व में रियाज़ के भू राजनीतिक वज़न को कम कर रहा है और यही कारण है कि शाही ख़ानदान उर्दोग़ान की सरकार को हिलाने के लिए अपनी सहायता को रोकने को सोच रहा है।
जमाल के अनुसार तुर्की के राष्ट्रपति ने सऊदी अरब की आरोपों के उत्तर में बहरीन बादशाह से कहा है कि वह सऊदी बादशाह को बता दें कि तुर्की कभी भी सीरिया संकट में रियाज़ के राजनीतिक रोल को समाप्त करने को नहीं सोच रहा है, और तुर्की जीसीसी का प्रतिनिधित्व करता रहेगा और आर्थिक सहायता को जारी रखने की सूरत में शैख़ों के हितों का सम्मान करता रहेगा।

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