तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने कहा है कि ऊपरी करबख में अज़रबैजान की जीत से क्षेत्र में शांति और स्थिरता के नए अवसर सामने आए हैं। तुर्की के संचार निदेशालय ने एक बयान में कहा कि फोन पर अपने अज़रबैजान समकक्ष इल्हाम अलीयेव से बात करते हुए उन्होंने यह बात कही।

एर्दोगान ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि तुर्की का समर्थन और सहयोग सभी क्षेत्रों में जारी रहेगा, उन्होंने ऊपरी करबख में मरम्मत और निर्माण गतिविधियों की शुरुआत पर प्रसन्नता व्यक्त की, जो आर्मेनिया के कब्जे से अज़रबैजान द्वारा आजाद कराया गया।

आर्मेनिया और अजरबैजान दो पूर्व सोवियत गणराज्यों के बीच संबंध 1991 से तनावपूर्ण रहे हैं, जब अर्मेनियाई सेना ने ऊपरी कराबाख पर कब्जा कर लिया था, जिसे नागोर्नो-कराबाख के रूप में भी जाना जाता रहा है। जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अज़रबैजान क्षेत्र और सात निकटवर्ती क्षेत्रों के रूप में मान्यता प्राप्त थी।

27 सितंबर, 2020 को नई झड़पें हुईं, इस दौरान अर्मेनिया ने नागरिकों और अज़रबैजानी बलों पर हमले शुरू किए और यहां तक ​​कि मानवीय युद्धविराम समझौतों का भी उल्लंघन किया। छह सप्ताह तक चले संघर्ष के दौरान, अजरबैजान ने कई शहरों और लगभग 300 बस्तियों और गांवों को आजाद कराया। इसमे कम से कम 2,802 सैनिक मारे गए।

लड़ाई को रोकने के लिए रूस की मध्यस्था में दोनों देशों के बीच 10 नवंबर, 2020 को समझौता हुआ। समझौते की निगरानी के लिए एक संयुक्त तुर्की-रूसी केंद्र स्थापित किया जा रहा है। क्षेत्र में रूसी शांति सैनिक भी तैनात किए गए हैं। युद्ध विराम को अजरबैजान की जीत और अर्मेनिया की हार के रूप में देखा जाता है, समझौते के अनुसार उसके सशस्त्र बल पीछे हट गए हैं।