अर्मेनियाई कब्जे के 27 साल बाद अज़रबैजान की सेना ने कलबाजार क्षेत्र में प्रवेश किया। इस बात की जानकारी अज़रबैजान  के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार तड़के दी।

मंत्रालय ने कहा, “अजरबैजान गणराज्य के राष्ट्रपति, रूसी संघ और आर्मेनिया गणराज्य के प्रधानमंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय बयान के अनुसार, अज़रबैजान सेना की इकाइयों ने 25 नवंबर को कलबाजार क्षेत्र में प्रवेश किया।”

अज़रबैजान और अर्मेनिया के पूर्व सोवियत गणराज्यों के बीच संबंध 1991 से तनावपूर्ण रहे हैं, जब अर्मेनियाई सेना ने नागोर्नो-कराबाख पर कब्जा कर लिया था, जिसे ऊपरी कराबाख के रूप में भी जाना जाता था, इस क्षेत्र को अजरबैजान के हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त थी।

27 सितंबर को फिर से नई झड़पें हुईं, इस दौरान अर्मेनियाई सेना ने नागरिकों और अज़रबैजानी बलों पर हमले शुरू कर दिए और मानवीय संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन किया।

44 दिनों के संघर्ष के दौरान, अजरबैजान ने कई शहरों और लगभग 300 बस्तियों और गांवों को अर्मेनियाई कब्जे से मुक्त कराया। 10 नवंबर को, दोनों देशों ने एक व्यापक संकल्प लेकर लड़ाई खत्म करने और साथ मिलकर काम करने के लिए रूस की मध्यस्था में समझौते पर हस्ताक्षर किए।

समझौते को अजरबैजान की जीत और आर्मेनिया की हार के रूप में देखा जाता है, जिसके सशस्त्र बल निर्दिष्ट समझौते के रूप में वापस ले रहे हैं।

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