यूएई और इजरायल के बीच समझौते को लेकर मुस्लिम दुनिया आश्चर्य में है। बहरीन, जॉर्डन, मिस्र, और ओमान जैसे मुस्लिम मुल्कों ने इस डील का स्वागत किया है। तो वहीं तुर्की, ईरान ने डील पर कडा विरोध जताया है। वहीं अब सबकी निगाह सऊदी अरब पर है। जिसने इस मामले में अब तक अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है।

सऊदी अरब खाड़ी की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है। लेकिन यूएई-इजरायल संधि पर सउदी की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। गुरुवार की सुबह, सऊदी अरब में तीसरे स्थान पर अरबी हैशटैग “Gulfis_Against_Normalisation” ट्रेंड कर रहा था।

सऊदी अरब और इजरायल दोनों ही ईरान को मध्य पूर्व के लिए बड़े खतरे के रूप में देखते हैं। तेहरान और रियाद के बीच बढ़ते तनाव ने उन अटकलों को हवा दी है कि साझा हित सउदी और इजरायल को एक साथ काम करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

हालाँकि, इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों के संरक्षक के रूप में किंग सलमान की स्थिति यूएई के समान कदम उठाना कठिन बना देती है। इसके अलावा कुवैत की ओर से भी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, न ही कतर से, जो तीन साल से सउदी, यूएई, बहरीन और मिस्र के साथ एक तेज राजनीतिक विवाद में है।

वहीं पाकिस्तान भी इस मुद्दे पर खामोश है। पाकिस्तान इस मामले में कोई निर्णय लेने से पहले पूरी तरह से जांच करेगा। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, जो हाल ही में सऊदी अरब और इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के संबंध में अपने बयानों के लिए विवादों का केंद्र हैं, शाम को मीडिया के संपर्क से परहेज किया। वह सार्वजनिक रूप से बातचीत करने के लिए तैयार नहीं दिखे।

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