Wednesday, July 28, 2021

 

 

 

जंग खत्म कर देंगे अगर अर्मेनिया मान लेता है हमारी शर्त – अजरबैजान प्रेसिडेंट

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पिछले दिनों से जारी दो देशों अज़रबैजान तथा आर्मेनिया की जंग पर अभी तक कोई रोकथाम नही हुई है, हालाँकि पूरी दुनिया इस जंग को खत्म करने के लिए दोनों देशों पर दवाब डाल रहे हैं. इस बीच, अजरबैजान के राष्ट्रपति ने जंग खत्म करने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं. उनका कहना है कि यदि अर्मेनिया इन शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो वह युद्ध बंद कर देंगे.

अजरबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा कि अर्मेनियाई सेना ने उस इलाके पर कब्जा कर रखा है, जिसे वह 1990 के दशक में हार चुका है. अर्मेनिया जानबूझकर युद्ध भड़का रहा है. यदि अर्मेनियाई सेना तुरंत हमारे इलाके से पीछे हटती है, पूरी तरह से वापसी की समयसीमा बताती है और जो कुछ किया है उसके लिए माफी मांगती है तो हम युद्ध खत्म करने को तैयार हैं.

अज़रबैजान की क्षेत्रीय अखंडता को पहचानना होगा
अलीयेव ने कहा कि अर्मेनिया को अजरबैजान की क्षेत्रीय अखंडता को स्वीकारना होगा, यही युद्ध खत्म करने का एकमात्र तरीका है. उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को लागू करने और अजरबैजान के प्रभाव वाले क्षेत्रों से अर्मेनियाई सेना को वापस भेजने के लिए दबाव बनाने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय नाकाम रहा है.

अलीयेव के रुख से यह स्पष्ट है कि उनका रूस, अमेरिका और यूरोपीय संघ के युद्ध विराम के आग्रह को मानने का कोई इरादा नहीं है. वहीं, अलीयेव के भाषण के तुरंत बाद, अर्मेनियाई रक्षा मंत्रालय ने भी बयान जारी किया है. मंत्रालय का कहना है कि हमें कोई खतरा नहीं है, लेकिन फिर भी हम हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. इससे पहले, अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोलस पशिनियन ने भी साफ कर दिया था वह अजरबैजान के साथ वार्ता के लिए तैयार नहीं हैं.

क्या है सबसे बड़ा ख़तरा
हालाँकि दोनों देश एक दुसरे पर आरोप लगा रहा है की युद्ध की शुरुआत उन्होंने की है और इसी गतिरोध को लेकर हवाई हमले तथा ठिकानों को निशाना बनाया जाना लगातार जारी है. परन्तु रूस के शामिल होने से इस मामले को एक बड़ी तबाही के तौर पर देखा जा रहा है. जिसके कारण विश्व शांति की अपील कर रहा है. अमेरिका सहित कई देशों ने अर्मेनिया और अजरबैजान से युद्ध बंद करने के अपील की है. पिछले कई दिनों से जारी इस जंग में अब रूस, तुर्की, फ्रांस, ईरान और इजराइल के भी शामिल होने का खतरा बढ़ गया है.

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