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नई दिल्ली: पंजाब नैशनल बैंक में 14 हजार करोड़ रुपये का घौटाला कर देश छोड़ फरार हुए मेहुल चोकसी को एंटीगुआ ने भारत को सौंपने से मना कर दिया है।

एंटीगुआ सरकार का कहना है कि उनकी भारत के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। साथ ही एंटीगुआ ने नियमों के मुताबिक ही मेहुल चोकसी को नागरिकता दी गई है। ऐसे में उनको भारत प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा। बता दें कि भारत ने एंटीगुआ से 9 अगस्त को मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण को लेकर उसके अनुरोध किया था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस मुद्दे पर 9 अगस्त को संवाददाताओं के सवालों का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘हमें बताया गया है कि वे (एंटीगुआ के प्राधिकारी) अनुरोध (प्रत्यर्पण) पर गौर कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि भारत के अनुरोध पर एंटीगुआ के प्राधिकारियों की क्या प्रतिक्रिया होगी।

कुमार ने कहा कि एंटीगुआ और बारबुडा के प्रत्यर्पण कानून, 1993 के तहत किसी भगोड़े को ऐसे किसी निर्दिष्ट राष्ट्रमंडल देश को प्रत्यर्पित किया जा सकता है जिसके साथ सामान्य या विशेष व्यवस्था या एक द्विपक्षीय संधि है। हालांकि अब एंटीगुआ ने चोकसी को भारत को सौंपने से मना कर दिया है।

मेहुल चोकसी ने एंटीगुआ सरकार के सिटीजनशिप फॉर इन्वेस्टमेंट कार्यक्रम के तहत वहां शरण ली थी। इस योजना के अनुसार, कोई भी व्यक्ति सिर्फ 1.3 करोड़ रुपए देकर एंटीगुआ की नागरिकता पा सकता है।

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