Friday, December 3, 2021

अमेरिकी सांसद ने बिन सलमान को बताया ‘गैंगस्टर’, कहा – साथ देना होगा नुकसानदेह

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अमरीकी लॉ मेकर्स और रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रुबियो ने सऊदी प्रिंस मोहम्‍मद बिन (एमबीएस) को ‘बदमाश’ करार दिया है। जबकि ट्रंप की ओर से नामित और सऊदी अरब के लिए संभावित अमरीकी राजदूत व सीनेटर अबिजैद ने सऊदी सरकार और वहां के प्रिंस का खुलकर बचाव किया है।

सीनेटर रुबियो के आरोप का समर्थन एक अन्‍य रिपब्लिकन सिनेटर रॉन जॉनसन ने भी किया है। उन्‍होंने सीनेट की विदेश संबंध समिति को बताया है कि प्रिंस सलमान लापरवाह हैं। वह निर्दयी हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर वह टकराव की स्थिति पैदा कर सकते हैं। उनका साथ देना अमरीका के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसलिए बेहतर यही होगा कि अमरीका सऊदी अरब से दूरी बनाकर रखे।

इससे पहले अमेरिकी सांसदों ने राजकुमार सलमान पर खशोगी की हत्या का आरोप लगाया था। सांसद लिंडसे ग्राहम ने भी इस बात में हामी भरी थी। दक्षिण कैरोलिना रिपब्लिकन ने कहा था कि सऊदी राजकुमार “विनाश करने वाला, खतरनाक और क्रेजी है।” बता दें खशोगी हत्या मामले में सऊदी अरब ने 11 लोगों पर आरोप लगाया है लेकिन इस बात से इनकार कर दिया है कि इसमें प्रिंस सलमान भी शामिल थे।

trump congress

दूसरी ओर राष्‍ट्रपति ट्रंप की ओर से नामित और साऊदी अरब के लिए संभावित अमरीकी राजदूत व सेवानिवृत जनरल जॉन अबिजैद ने अमरीका और सऊदी अरब के बीच जारी करीबी संबंधों का बचाव किया है। सीनेटर अबिजैद ने सीनेट की विदेश नीति संबंध समिति के सामने कहा है कि सामरिक और रणनीतिक हितों को देखते हुए सऊदी अरब के साथ बेहतर संबंध अमरीका के हित में है।

उन्‍होंने कहा कि जहां तक यमन गृह युद्ध में सऊदी अरब की भूमिका और पत्रकार जमाल खशोगी की हत्‍या की बात है तो इसके लिए एमबीएस को दोषी ठहराने से पहले जिम्‍मेदारी तय करने की जरूरत है। अबिजैद ने तो विदेश संबंध समिति से कहा है कि दीर्घकालिक हितों को देखते हुए सऊदी अरब से पहले से ज्‍यादा मजबूत संबंध बनाने की जरूरत पर दिया है।

सीनेट कमिटि के सदस्यों ने सीआईए निदेशक जीना गैस्पेल की ओर से ब्रीफिंग के बाद विदेशी संबंधों पर अपने विचार रखे थे। ग्राहम ने इस्तांबुल के वाणिज्य दूतावास में खशोगी की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि “यहां कोई स्मोकिंग गन नहीं है लेकिन वह दिख रही है”।

सांसद ने कहा था कि वह यमन की लड़ाई में सऊदी की भागीदारी के समर्थन में नहीं हैं और न ही वह सऊदी को हथियारों की बिक्री का समर्थन करते हैं। वह ऐसा तब तक करते रहेंगे जब तक सऊदी प्रिंस सत्ता में रहते हैं।

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