indian prime minister narendra modi shakes hands with u.s. ambassador to the united nations nikki haley before the start of their meeting in new delhi
Indian Prime Minister Narendra Modi shakes hands with U.S. Ambassador to the United Nations Nikki Haley before the start of their meeting in New Delhi, India June 27, 2018. India's Press Information Bureau/Handout via REUTERS ATTENTION EDITORS - THIS PICTURE WAS PROVIDED BY A THIRD PARTY. NO RESALES. NO ARCHIVE.

अमेरिका ने एक बार फिर भारत सहित कई देशों को धमकाया है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि वे 4 नवंबर तक ईरान से तेल का आयात बंद कर दें वरना प्रतिबंध झेलने के लिए तैयार रहें।

मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा, “इस फैसले में किसी भी देश को छूट नहीं दी जाएगी। भारत और चीन को इस बारे में जानकारी दे दी गई है। इसके बावजूद अगर वहां की कंपनियां ईरान से तेल आयात बंद नहीं करतीं तो उन पर भी अन्य देशों की तरह प्रतिबंध लगाए जाएंगे।”

उन्होंने आगे कहा, हालांकि ट्रंप प्रशासन ने अभी तक इस बारे में चीन, भारत या तुर्की से साथ बातचीत नहीं की है, लेकिन हम साफ कर रहे हैं कि यह प्रतिबंध सभी को झेलने पड़ सकते हैं। हमारा इरादा सभी देशों से ईरान से तेल आयात में कटौती करने के लिए दबाव डालना है।

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बता दें कि इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर है। अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 तक ईरान भारत को 1 करोड़ 84 लाख टन कच्चा तेल निर्यात कर चुका है। ईरान सबसे ज्यादा तेल चीन को निर्यात करता है। ऐसे में अमेरिका सहयोगी देशों पर दबाव डालकर ईरान के सबसे बड़े आय स्रोत को खत्म करना चाहता है।

इसी बीच अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने बुधवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।  इस मुलाकात में अमेरिकी अधिकारी की बात को दोहराते हुए निक्की हेली ने पीएम मोदी से कहा कि भारत को ईरान के तेल पर निर्भरता को कम करना होगा।

हालांकि इस मुलाकात में हेली ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान के लिए कॉरिडोर के तौर पर अमेरिका भारत को चाबहार पोर्ट का इस्तेमाल करने से नहीं रोकेगा। बता दें कि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह सिर्फ सयुंक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को पालन करेगा।