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रूस से एस -400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के बाद से लगातार अमेरिका भारत को प्रतिबंध की धमकी देता आया है। अब अमेरिका ने इन प्रतिबंधों से बचने के लिए भारत को एफ-16 फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने को कहा है। हालांकि भारत को एयरक्राफ्ट को खरीदने की कोई मंशा नहीं है। क्योकि ये पाकिस्तान के पास  पहले से ही है।

शुक्रवार को सिंगापुर में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और अमेरिकी समकक्ष जेम्स मैटिस के बीच व्यापक चर्चा में एस-400 सौदे पर ट्रम्प प्रशासन की प्रतिक्रिया नजरअंदाज किया। अमेरिका की और से F-16 की खरीद पर CAATSA से छूट की पेशकश इस महीने के शुरुआत में की गई थी। इस मामले में भारत की रक्षामंत्री निर्मला सीतारण और अमेरिका रक्षामंत्री जेम्स मैटिस की मुलाकात एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन डिफेंस मीटिंग प्लस (ADMM Plus) के इतर हुई थी।

बताया जा रहा है कि सीतारामन भी दिसंबर के मध्य में रक्षा मंत्री के रूप में अमेरिका की पहली द्विपक्षीय यात्रा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि मैटिस तब भी ट्रम्प प्रशासन का हिस्सा होंगे। मैटिस CAATSA से भारत को छूट देने के लिए प्रबल समर्थक रहे हैं। इसके लिए उन्होंने यूएस कांग्रेस में जोरदार बहस भी की थी।

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बता दें कि बीते दिनों अमेरिका की और से मिल रही पाबंदियों की धमकी पर सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारत अपनी स्वतंत्र नीति पर चलता रहेगा। इतना ही नहीं आर्मी चीफ ने ये भी  बताया था कि भारत रूस से कामोव हेलिकॉप्ट और दूसरे हथियार भी लेने का इच्छुक है। भारत रूस से अंतरिक्ष आधारित प्रणाली और तकनीक भी हासिल करेगा।

इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह कहा था कि ‘भारत आपके सोचने से पहले ही इसका जवाब ढूंढने जा रहा है। यह कोई कंबल की छूट नहीं है जो किसी भी देश को दे दी जाए।’ ट्रंप ने आगे कहा कि CAATSA पर छूट के लिए किसी भी देश को अन्य चीजों के साथ हथियारों पर रूस से अपनी निर्भरता कम करनी होगी। भारत भी CAATSA के तहत आएगा अगर वह रूस को इसके लिए भुगतान करता है।

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