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US President Donald Trump (L) and Israel's Prime Minister Benjamin Netanyahu shake hands after delivering a speech at the Israel Museum in Jerusalem on May 23, 2017. / AFP PHOTO / GIL COHEN-MAGEN

लगातार धमकियों देने के बाद आखिरकार अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार से बाहर होने का ऐलान कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को इजराइल विरोधी बताते हुए अमेरिका 47 सदस्‍यों वाली इस परिषद से अलग हुआ है। अमेरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और संयुक्त राष्ट्र के लिए अमेरीका की दूत निकी हेली ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की घोषणा की।

निकी हैली ने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से बाहर हो रहा है।हेली ने कहा कि परिषद उन देशों का बचाव करती है जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं। हेली ने वेनेजुएला, चीन, क्यूबा और ईरान का उदाहरण देते हुए कहा इस परिषद में कई ऐसे सदस्य मौजूद हैं जो मानवाधिकारों की इज्जत नहीं करते।

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उन्होंने कहा कि परिषद दुनिया के उन्हीं देशों को बलि का बकरा बनाता है जिनका रिकॉर्ड मानवाधिकारों के मामले में बेहतर है। ऐसा परिषद इसलिए करता है ताकि अधिकारों को तोड़ने वाले देशों से दुनिया का ध्यान हटाया जा सके।

हेली ने रूस, चीन, क्यूबा और मिस्त्र जैसे देशों पर आरोप लगाते हुए कहा अमेरिका ने परिषद में बहुत से सुधार करने की कोशिश की लेकिन ये देश इसमें अड़चनें लाते रहे और कोई सुधार नहीं होने दिया।

बता दें कि अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्‍ल्‍यू बुश के शासन काल में भी तीन साल तक मानवाधिकार परिषद का बहिष्‍कार किया था, लेकिन ओबामा के राष्‍ट्रपति बनने के बाद 2009 में वह इस परिषद में फिर से शामिल हुआ था।

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