मास्को | अमेरिका ने शुक्रवार सुबह अफगानिस्तान के नंगरहार प्रान्त में सबसे बड़े गैर परमाणु बम को गिरा दिया. यह बम ISIS को निशाना बनाते हुए गिराया गया है. इस बम को ‘सभी बमों की माँ’ भी कहा जाता है. अमेरिका ने 2003 में इस बम का परीक्षण किया था लेकिन अभी तक इस बम को किसी भी देश के ऊपर इस्तेमाल नही किया गया. यह पहला मौका है जब अमेरिका ने इतने बड़े बम को अफगानिस्तान के ऊपर गिराया है.

दरअसल अमेरिका को खबर मिली थी की नंगरहार प्रांत में मौजूद सुरंगों में ISIS आतंकी छुपे है. इन सभी आतंकी को उनके अंजाम तक पहुँचाने के लिए अमेरिका ने GBU-43/B मैसिव ऑर्डनंस एयर ब्लास्ट (MOAB ) का इस्तेमाल करने का फैसला किया. यह बम जीपीएस के जरिये संचालित होता है. इसको गिराने के लिए एक एयरक्राफ्ट का सहारा लिया जाता है. खबर है की जहाँ यह बम गिरा वहां 300 मीटर चौड़ा गड्ढा बन गया है.

MOAB के बारे बताया गया है की इस बम में दो चरणों में विस्फोट होता है. पहले चरण में एलुमिनियम युक्त धुवाँ फैलता है जबकि दूसरा विस्फोट सुरंगों और आस पास के इलाके से ऑक्सीजन को खत्म कर देता है. इससे वहां मौजूद लोगो के कानो से खून निकलना शुरू हो जाता है, उनके फेफड़े फट जाते है , जिसके बाद उसकी मौत हो जाती है. इस बम से 11 टीएनटी बमों के धमाके के बराबर होता धमाका होता है.

बताया जाता है की हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 15 टीएनटी बम जितना धमाका हुआ था. चूँकि यह परमाणु बम नही है इसलिए इससे रेडिएशन फैलने का खतरा नही होता. ज्यादा तबाही मचाने के लिए इस बम में जमीन से छह फूट ऊपर विस्फोट किया जाता है. हालाँकि जब यह बम बनाया गया तब यह दुनिया का सबसे बड़ा गैर परमाणु बम था लेकिन 2007 में रूस ने इससे भी बड़ा बम बना लिया.

रूस ने इसे  ‘रशियाज़ एविएशन थर्मोबैरिक बॉम’ (FOAB) नाम दिया. इस बम को फादर ऑफ़ आल बम भी कहा जाता है. यह बम MOAB से चार गुना ज्यादा शक्तिशाली है. जब इस बम का परीक्षण किया गया तो इसकी ताकत 44 टीएनटी बमों जितनी आंकी गयी. इस बम के इस्तेमाल से 1000 फीट का इलाका प्रभावित होता है. जानकार इस बम की तुलना परमाणु बम से करते है क्योकि इस बम में हवा में ही विस्फोट करना पड़ता है. इसके बाद टारगेट भाप की तरह उड़ जाते है.

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