Monday, July 26, 2021

 

 

 

अमेरिका ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर फिर जताई गहरी चिंता

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता (India Religious Freedom) के हालात पर अमेरिका बेहद चिंतित है। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए राजनयिक सैमुअल ब्राउनबैक का यह बयान बुधवार को ‘2019 अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट’ जारी होने के बाद आया है।

रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों ने संविधान के अनुसार अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दिए जाने की जरूरत पर जोर दिया है। भारत इससे पहले अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट को यह कहकर खारिज कर चुका है कि एक विदेशी सरकार को देश के लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

विदेशी पत्रकारों के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान ब्राउनबैक ने बुधवार को कहा कि भारत ऐसा देश है जिसने खुद चार बड़े धर्मों को जन्म दिया। उन्होंने कहा, ‘भारत में जो भी हो रहा है हम उससे बहुत चिंतित हैं. वह ऐतिहासिक रूप से सभी धर्मों के लिए बहुत ही सहिष्णु, सम्मानपूर्वक देश रहा है।’

ब्राउनबैक ने कहा कि भारत में जो चल रहा है वह बहुत ही परेशान करने वाला है क्योंकि यह बहुत ही धार्मिक उपमहाद्वीप है और वहां अधिक सांप्रदायिक हिंसा देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा, ‘हम और परेशानी देखने जा रहे हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि भारत में बहुत उच्च स्तर पर अंतर धार्मिक संवाद शुरू होना चाहिए और फिर विशिष्ट मुद्दों से निपटना चाहिए। भारत में इस विषय पर और कोशिशें करने की जरूरत है और मेरी चिंता भी यही है कि अगर ये कोशिशें नहीं की गईं तो हिंसा बढ़ सकती है।’

एक सवाल के जवाब में ब्राउनबैक ने कहा कि कोरोना वायरस के फैलाव के लिए अल्पसंख्यकों को दोषी मानना ठीक नहीं है। अल्पसंख्यकों के पास इस वक्त में हेल्थकेयर और खाने-पीने के सामान की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय जनता पार्टी समेत हिंदू बहुसंख्यक पार्टियों के कुछ अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर या सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अल्पसंख्यकों के खिलाफ बयान दिए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, ‘प्रशासन ‘गोरक्षा के नाम पर की गई हत्याओं, भीड़ की हिंसा और डराने-धमकाने वाले लोगों सजा देने में अकसर विफल हो जाते हैं। कुछ NGO के मुताबिक प्रशासन ने कई बार इन लोगों को सजा से बचाया है और पीड़ित के खिलाफ केस लगाए हैं।’

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