बीते दिनों अमेरिका में एक चेहरा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विरुद्ध हो रहे विरोध का चेहरा बना हुआ हैं. ये चेहरा बांग्लादेशी अमरीकी लड़की मुनीरा अहमद का जो अमेरिका में हुए विमेंस मार्च में कई पोस्टरों पर देखी गई. अमेरिकी औरतें मुनीरा अहमद की तस्वीरें हाथ में लिए हुई थी. जिस पर लिखा था  ‘हमारा बराबरी पर यकीन हैं.’

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के दूसरे ही दिन शनिवार को हजारों लोगों ने विरोध में मार्च किया था, इसी मार्च में  मुनीरा अहमद ने मरीका के झंडे स्टार और स्ट्राइप को हिजाब के रूप में पहन कर ट्रम्प का विरोध किया था. मुनीरा की इस तस्वीर को शेपर्ड फैरे ने तैयार कर शेयर किया था. बता दे कि शेपर्ड वही कलाकार हैं जिन्होंने अमरीका के 44वें राष्ट्रपति बराक ओबामा का भी पोट्रेट तैयार किया था.

वॉशिंगटन से न्यूयार्क लौटने के बाद मुनीरा अहमद ने बताया कि इस विरोध मार्च में मेरा संदेश था कि मैं एक अमरीकी और एक मुसलमान हूं. मुझे इन दोनों पर ही गर्व है.  मुनीरा ने ‘द गार्डियन’ अखबार से बात करते हुए कहा, मुझे उन लोगों को देखकर दुख होता है जो ट्रम्प का गलत वजहों से साथ देते हैं. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका में अब भी लोग सोचते हैं कि दूसरे मूल के लोगों को अमेरिका में जगह नहीं मिलनी चाहिए. मुझे नहीं लगता कि जिन मूल्यों पर अमेरिका खड़ा है, वो ये कहते हैं.

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उन्होंने आगे कहा, लोग याद रखें कि अमेरिका देश अगर प्रगति कर रहा है तो उसमें बाहर से आए लोगों का एक बड़ा हाथ है. और हां, जो इस देश को महान बनाता है वो भी इसकी हर तरह के लोगों को स्वीकारने और अनेकता में एकता बनाए रखने में है.’

इस तस्वीर को सात साल पहले रिदवान अदहमी नाम के फोटोग्राफर ने खींचा था. इस तस्वीर को खींचने के लिए रिदवान और मुनीरा न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज गए थे. ताकि स्टॉक एक्सचेंज को बैकग्राउंड में रख तस्वीर को मायने दे सकें.

मुनीरा ने हालिया प्रतिबंध को लेकर कहा कि मुझे उन लोगों को देखकर दुख होता है जो ट्रम्प का गलत वजहों से साथ देते हैं. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका में अब भी लोग सोचते हैं कि दूसरे मूल के लोगों को अमेरिका में जगह नहीं मिलनी चाहिए. मुझे नहीं लगता कि जिन मूल्यों पर अमेरिका खड़ा है, वो ये कहते हैं.

जब उनसे अमेरिकी झंडे को हिजाब बनाने के बारें में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हिजाब में झंडा होना अपने आप में एक स्टेटमेंट है. इससे हमें याद आता है कि इस देश नींव में ही लोगों को हर तरह के धर्म मानने की छूट है. अमेरिका के इतिहास में हर तरह, हर मूल के लोगों को अपनाया गया है. यही अमेरिका की ताकत है.

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