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सीरिया में अमेरिका की और से गठित 30000 कुर्दों की सेना के खिलाफ तुर्की की और से ऑपरेशन आफरीन के ऐलान के साथ ही अमेरिका ने कुर्दों को दी जा रही मदद को लेकर अपने कदम पीछे खींच लिए. साथ ही कुर्दों ने विश्व शक्तियों से मदद की गुहार लगाई है.

ध्यान रहे सोमवार को तुर्की ने सनलीउर्फ़ा प्रांत के विरानसहीर ज़िले में 20 गाड़ियों पर आधारित सैन्य दल को जिसमें टैंक भी शामिल है को भेजा गया है ताकि सीरियाई सीमा पर पहले से मौजूद सैनिकों की मदद हो.

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तुर्की ने ये कदम राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान के उस बयान के बाद उठाया है. जिसमे उन्होंने अमेरिका पर तुर्की सीमा के करीब आतंकियों की फ़ौज का गठन करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि हम अमेरिका की इस आतंकी फ़ौज का कुचल कर रख देंगे.

उन्होंने कहा था, 30,000 आतंकियों की इस सेना में कुर्द भी शामिल है. जिसका गठन अमेरिका तुर्की की  दक्षिणी सीमा पर कर रहा है. एर्दोगान ने कहा कि हमे इस आतंकी सेना को बनने से पहले कुचलना है.

ध्यान रहे “कुर्दस्तान श्रमिक पार्टी” (पीकेके) को तुर्की ने आतंकवादी संगठन के रूप में ब्लैकलिस्ट किया हुआ है. लेकिन अमेरिका पीकेके को हथियार उपलब्ध कराने से सहित अन्य मदद उपलब्ध कराता आया है.