तुर्की में राष्ट्रपति शासन प्रणाली लाए जाने को लेकर कराए गए एतिहासिक जनमत संग्रह में राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान को बहुमत मिल गया हैं. अब वो 2029 तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं.  तुर्की के प्रधानमंत्री बिनाली यीलदीरिम ने राष्ट्रपति रेसप तैयीप एरदोगन की शक्तियों में विस्तार को लेकर हुए जनमत संग्रह में ‘हां’ खेमे की जीत का ऐलान किया है. साथ ही, उन्होंने कहा कि देश ने लोकतंत्र का एक नया अध्याय खोला है.

जनमत संग्रह के बाद तुर्की की शासन व्यवस्था में होंगे ये परिवर्तन

जनमत संग्रह में मिली जीत के बाद अब अर्दोग़ान संवैधानिक परिवर्तन का सबसे व्यापक कार्यक्रम का प्रतिनिधित्व करेंगे. उनके पास कैबिनेट मंत्रियों को नियुक्त करने, फैसले जारी करने, वरिष्ठ न्यायाधीश चुनने और संसद को भंग करने के लिए शक्तियां मिल जाएंगीं.

नई प्रणाली में प्रधानमंत्री के पद को ख़त्म कर दिया जाएगा और सारी शक्तियां राष्ट्रपति के हाथों में दे दी जाएंगीं जिसमें देश की नौकरशाही भी उनके नियंत्रण में होगी.

नए संविधान में क्या होगा ?

  • बनाए गए मसौदे के अनुसार अगले राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव 3 नवंबर 2019 को होंगे.
  • राष्ट्रपति का शासन काल पांच साल का होगा और अधिकतम दो कार्यकाल तक होगा.
  • राष्ट्रपति के सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों को सीधे नियुक्त करने का अधिकार होगा.
  • वो एक या उससे अधिक उप राष्ट्रपति रखने का अधिकार रखेंगे.
  • प्रधानमंत्री के पद को ख़त्म कर दिया जाएगा. अभी बिनाली यिल्दरिम तुर्की के प्रधानमंत्री हैं.
  • राष्ट्रपति के पास न्यायिक मामलों में दख़लअंदाज़ी का अधिकार होगा.
  • राष्ट्रपति तय करेंगे कि आपातकाल की स्थिति को लागू किया जाए या नहीं किया जाए.

बीबीसी इनपुट के साथ

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