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बोस्निया के पूर्व मिलिट्री कमांडर रातको म्लादिक को बोसनिया के 1991-1995 के युद्ध के दौरान 8000 निहत्थे मुस्लिमों को जान लेने के आरोप में उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है.

‘बोस्निया के कसाई’ के नाम से कुख्यात म्लादिक को  यूनाइटेड नेशन ट्राइब्यूनल ने सज़ा सुनाई है. जिस वक्त मुस्लिमों का नरसंहार हुआ था उस वक्त रैट्को म्लाडिच एक आर्मी जनरल थे.

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म्लादिक ने रेब्रिनिका टाउन को कब्जे में लेने के बाद 8000 निहत्थे मुस्लिम मर्दों और लड़कों को मारने का ऑर्डर दिया था. साथ ही बोस्नियाई राजधानी साराजेवो की घेराबंदी के दौरान नागरिकों पर तोपें तक चलवाई थी. जिसमे हजारों निहत्थे मुसलमान मारे गए थे.

ध्यान रहे 1992 में बोस्नियाई मुसलमानों और क्रोएशियाई लोगों ने आज़ादी के लिए कराये गए जनमत संग्रह के पक्ष में वोट दिया था जबकि सर्बिया के लोगों ने इसका बहिष्कार किया था. जिसके बाद बोस्निया में लड़ाई भड़क गई. बोस्नियाई मुसलमान और क्रोएट्स लोग एक तरफ़ थे तो दूसरी तरफ़ बोस्नियाई सर्ब.

राष्ट्रवाद के नाम पर हुई इस लड़ाई में एक लाख से ज़्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई और तकरीबन 22 लाख बेघर हुए. तुर्की मूल के मुसलमानों का बोस्निया पर 500 सालों तक राज रहा. ऐसे में इस लड़ाई को मुस्लिमों से बदले के रूप में लिया जाता है.

न्यायाधीश अल्फोंस ओरी ने फैसला सुनाया कि सेरेब्रेनिका में किए गए अपराधों के अपराधियों ने वहां रहने वाले मुसलमानों को नष्ट करने का इरादा किया था. न्यायाधीश ने यह भी कहा कि रातको म्लादिक ने साराजेवो पर व्यक्तिगत रूप से गोलीबारी चलाने का आदेश दिया था. उन्होंने कहा, ये अपराध मानव जाति पर किये गए सब से घृणित अपराधों में से एक है.

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