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25 अगस्त के बाद रखाइन राज्य में म्यांमार सेना के सैन्य अभियान और अतिवादी बौद्ध चरमपंथियों की हिंसा में एक महीने के भीतर 6700 रोहिंग्या मुसलमानों की जान ली गई.

डॉक्टर्स विदआउथ बॉर्डर्स (एमएसएफ) की और से जारी रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य कार्रवाई के पहले ही महीने में कम से कम 6,700 रोहिंग्या मुसलमान मारे गए थे. इनमें पांच साल से कम उम्र के 730 बच्चे भी शामिल हैं.

एमएसएफ ने बताया कि कम से कम भी अनुमान लगाए तो भी 6,700 रोहिंग्या हिंसा में मारे गए थे. समूह की यह पड़ताल रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में 2,434 से ज्यादा घरों पर किए गए छह सर्वेक्षण से सामने आई है.

सर्वेक्षण के मुताबिक, 69 फीसदी मामलों में मौत गोली लगने से हुई, जबकि नौ फीसदी मौतें घरों में जिंदा जलाने से हुईं. पांच प्रतिशत लोगों को पीट-पीटकर मारा डाला गया.

इनमे पांच साल से कम उम्र के करीब 60 फीसदी बच्चों की मौत गोली लगने की वजह से हुई है. हालंकि म्यांमार सेना का कहना है कि शुरुआती कुछ सप्ताह में  केवल 400 लोगों की मौत हुई है.

गौरतलब रहे कि म्यांमार सेना के इस सैन्य अभियान और अतिवादी बौद्ध चरमपंथियों की हिंसा के चलते लाखों की तादाद में रोहिंग्याओं को पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरण लेना पड़ा है.

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