A civil defence member carries a child that survived from under the rubble at a site hit by airstrikes in the rebel held area of Old Aleppo, Syria, April 28, 2016. Picture Courtesy: Reuters

मध्य-पूर्व को कब्रस्तान बनाने पर तुले पश्चिमी देशों की साम्राज्यवादी नीतियों के चलते लाखों लोग अपनी जान गँवा चुके है. ये सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है.

2011 में शुरू हुए सीरिया युद्ध में अब तक करींब पांच लाख लोग अपनी जान गंवा चुके है. अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी अधिकार संगठन के अनुसार, मार्च 2011 से नवंबर 2017 तक 4 लाख 65 हज़ार नागरिकों की हत्या हो चुकी है. मरने वालों में 26466 बच्चे शामिल हैं.

सीरिया में युद्ध के दौरान मारे जाने वालों की संख्या का आंकड़ा पेश करते हुए अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी अधिकार संगठन के उपाध्यक्ष अबदुल्ला रसूल देमिर ने कहा कि सीरिया में इस शताब्दी के सबसे गंभीर मानव अधिकारों का हनन हुआ है.

उन्होंने कहा कि सीरिया युद्ध के दौरान लगभग एक करोड़ तीस लाख लोग अपने घरबार छोड़कर चले गए जो शरणार्थियों का जीवन जी रहे हैं.  उन्होंने यह भी बताया की सीरिया युद्ध ने पैंतिस लाख बच्चों को शिक्षा जैसे उनके मूलभूत अधिकार से वंचित कर दिया गया.

ध्यान रहे इससे पहले इराक, लीबिया आदि में भी पश्चिमी देशों की सनक लाखों मुस्लिमों की जान ले चुकी है. पीएसआर के एक अध्ययन के मुताबिक़ इराक में 1.7 मिलियन इराकी नागरिकों की मृत्यु हुई, जिनमें से आधे बच्चे बच्चे थे. इसके अलावा अफगानिस्तान में कम से कम 220,000 और पाकिस्तान में 80,000 लोग मारे जा चुके है.


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