न्यूजीलैंड की मस्जिद पर आतंकी हमले में 49 लोगों की मौ’त, हमलावर ट्रंप को मानता है आदर्श

6:48 pm Published by:-Hindi News

नई दिल्ली : न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर की दो मस्जिद में हुए आतंकी हमले में अब तक कम से कम 49 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 48 से ज्यादा लोग जख्मी बताए जा रहे हैं. वहीं हमलावर की पहचान 28 वर्षीय ब्रेंटन टैरंट के रूप में हुई है.

न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा एर्डर्न ने कहा, ‘यह सुनियोजित आतंकी हमला था’. हमलावर दक्षिणपंथी आस्ट्रेलियाई नागरिक था. प्रधानमंत्री जेसिंडा एर्डर्न ने न्यू प्लाईमाउथ में मीडिया को संबोधित करते हुए क्राइस्टचर्च की घटना को न्यूजीलैंड के इतिहास की सबसे खराब घटना बताया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावर ने फेसबुक पर लाइवस्ट्रीमिंग शुरू की थी. वीडियो की शुरुआत में ब्रेंटन ‘चलो पार्टी शुरू करते हैं’ कहता सुनाई दे रहा है. टैरंट ने गुरुवार रात को ही फेसबुक पर पोस्ट पर शेयर करते हुए लिखा था कि वह ‘आक्रमणकारियों’ पर हमला करेगा और उसे फेसबुक पर लाइव दिखाएगा.

इस घटना की लाइवस्ट्रिमिंग हमलावर ने उस वक्त शुरू किया, जब वो अल नूर मस्जिद में के बाहर गाड़ी पार्क कर रहा था. 17 मिनट के इस वीडियो में देखा गया कि ढेर सारे हथियार और विस्फोटक लेकर वो गाड़ी में आगे की सीट पर बैठा था. उसके पास पेट्रोल के कंटेनर भी थे. गाड़ी से उतरते ही उसने सबसे पहले मस्जिद की गेट पर फायरिंग की. इसके बाद तो वो ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने लगा.

donald trump reuters 1

ब्रिटिश अखबार ‘द सन’ के मुताबिक हमलावर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैन है. वह ट्रंप को गोरों की नई पहचान और साझा उद्देश्य के लिए प्रतीक भी मानता है. साथ ही हमलावर को व्हाइट सुप्रीमेसी की सनक भी है. हमला करने से पहले उसने लिखा, “अटैक करने वालों को दिखाना है कि हमारी भूमि कभी उनकी नहीं होगी. जब तक एक भी गोरा व्यक्ति रहेगा, वे कभी जीत नहीं पाएंगे.”

हमलावर द्वारा लिखे गए 87 पेज के मैनिफेस्टो के मुताबिक वो श्वेत जन्म दर बदलने की बात कर रहा है. उसका कहना है कि अगर कल को सभी गैर-यूरोपीय अप्रवासियों को श्वेत भूमि से बाहर भी निकाल दिया जाए तब भी यूरोपीय लोगों का नाश सुनिश्चित है.

हमलावर के मैनिफेस्टो के मुताबिक उसे नाटो देशों की सेना में तुर्की को शामिल किए जाने पर भी आपत्ति है. क्योंकि तुर्की विदेश है और मूलत: यूरोप का दुश्मन है. इसके अलावा वो फ्रांस के उदारवादी राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीयतावादी, वैश्विक और श्वेत विरोधी बताता है.

हमलावर बताता है कि उसके मन मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली घटना यूरोपीय देशों में हुए आतंकी हमले हैं. जिसके बाद उसने तय कर लिया कि लोकतांत्रिक, राजनीतिक हल के बजाय हिंसक क्रांतिकारी हल ही एकमात्र विकल्प है.

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