ईरान के उप सेना प्रमुख ने दावा किया हैं कि 2001 में अमेरिका मध्यपूर्व के क्षेत्र में आने के लिए ईरान पर हमला करना चाहता था. इसके लिए उसने 30 देशों के साथ मिल कर तैयारी भी की थी. उस वक्त उसका निशाना इराक और अफगानिस्तान न होकर ईरान था.

उप सेना प्रमुख अहमद रज़ा पूरदस्तान ने कहा कि वर्ष 2001 में अमरीका 30 देशों के समर्थन से मध्यपूर्व के क्षेत्र में आया था और वह इराक़ या अफ़ग़ानिस्तान पर हमला नहीं करना चाहता था बल्कि उसका लक्ष्य ईरान पर सैन्य हमला करना था लेकिन जब उन्होंने ईरानी बलों की तैयारी देखी और यह भी देखा कि ईरान का नेता एक सक्षम व युक्तिपूर्ण नेता है जो बड़े कौशल से देश को चला रहा है और जनता भी अपने नेता की भरपूर समर्थक है तो उनकी समझ में आ गया कि इस देश से नहीं लड़ा जा सकता.

उन्होंने कहा, इस्लामी क्रांति की सफलता की 38वीं वर्षगांठ के मौके पर कहा कि अगर कोई देश या राष्ट्र युद्ध के लिए तैयार हो और शत्रु की ओर से उत्पन्न की जाने वाली मुश्किलों से न घबराए तो निश्चित रूप से वही जीतेगा अतः युद्ध के लिए तैयारी बहुत ज़रूरी है और हमें अपनी क्षमताओं और योग्यताओं में वृद्धि करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब दुश्मन हमारी तैयारी को देख लेगा तो फिर कभी हमारे देश पर हमले की हिम्मत नहीं करेगा और इसी को प्रतिरोध कहते हैं.

उन्होंने सिपाहियों और जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि शांति के समय भी सैनिकों की तैयारी, शत्रुओं को संदेश देती है और उनके इरादों को डांवाडोल कर देती है तथा उनकी पंक्तियों में कमज़ोरी पैदा कर देती है अतः हमें हमेशा अपनी तैयारी को बनाए रखना चाहिए.

अहमद रज़ा पूरदस्तान ने कहा कि सैनिक वर्दी, एक गौरवपूर्ण वस्त्र है और सिपाहियों को इसका मूल्य समझना चाहिए क्योंकि यही वर्दी पवित्र प्रतिरक्षा के काल में आपके पिताओं ने धारण की थी और इस्लाम, क़ुरआन तथा देश की रक्षा की थी.


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