ड्र’ग्‍स के निजी सेवन पर अब सजा नहीं, केंद्र सरकार कर रही है NDPS ऐक्‍ट में बदलाव

हाल ही Dru’gs Case पर चलते इन मामलो को देख केंद्र सरकार एक बड़ा फैसला लेने की सोच रही है। केंद्र सरकार छोटी मात्रा में ड्र’ग्‍स, नार’कोटि’क्‍स या अन्‍य नशी’ले पदार्थों के निजी सेवन को अप’राध के दायरे से बाहर करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालयों के बीच इस बात को लेकर आम सहमति बन चुकी है।

सब चाहते हैं कि नार’कोटि’क, ड्र’ग्‍स एंड साइ’कोट्रोपि’क सबस्‍टेंसेज ऐक्‍ट, 1985 (NDPSA) की धारा 27 में संशोधन किया जाए। ड्र’ग्‍स यूजर्स की संख्‍या कम करने के लिए 30 दिन के रीहैबि’लिटेशन और डी-एडिक्‍शन प्रोग्राम को लॉन्‍च किया जा सकता है। वित्‍त मंत्रालय का राजस्‍व विभाग उन कड़े कानूनों में संशोधन पर विचार कर रहा है।

जिनके जरिए अ’वैध ड्र’ग्‍स व्‍यापार पर काबू और जब्‍ती होती है। इनमें समझौता-रहित जेल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। NDPS ऐक्‍ट को गवर्न करने वाले वित्‍त मंत्रालय ने बाकी मंत्रालयों को भी चर्चा में शामिल किया गया है। प्रस्‍तावित संशोधनों में ऐसे लोगों को जेल या जुर्माने की जगह इलाज और रीहैबि’लिटेशन अनिवार्य किए जाने का सुझाव भी है।

फिलहाल NDPS ऐक्‍ट की धारा 27 के तहत, ड्र’ग्‍स के सेवन पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना या फिर छह महीने की जेल या फिर दोनों हो सकता है। सामाजिक न्‍याय मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि छोटी मात्रा में ड्र’ग्‍स के साथ पकड़े गए लोगों और उनके परिवारों संग ‘पीड़‍ित’ की तरह व्‍यवहार हो, न कि अप’राधियों की तरह। ड्र’ग्‍स ट्रैफिकिंग में शामिल लोगों को कड़ी सजा हो, मगर लती और कम गंभीर अप’राध करने वालों को हल्‍की सजा मिले या फिर उन्‍हें रीहैबि’लिटेट किया जाए।

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