Tuesday, December 7, 2021

कश्मीर के खच्चर वालों ने पूरी दुनिया के सामने पेश की मिसाल, 70 किमी सफ़र करके वापस लौटाया गहनों का बैग

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जबभी आपके सुनने में अत है किस शख्स ने ईमानदारी का काम किया है तो आपको अपने देश पर फक्र होता है के आपके भारत देश के सभी भारतवासी बहुत ही ईमानदार है। ऐसी ही एक ईमानदारी की मिसाल कश्मीर के रहने वाले 2 युवको ने पूरी दुनिया के सामने पेश करदी। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में गुजरात (Gujarat) के सूरत (Surat) का एक परिवार कश्मीर घूमने गया था। परिवार लोग पहलगाम की सैर करने के बाद श्रीनगर (Srinagar) के होटल में वापस आ गए।

श्रीनगर आने के बाद जब इन्होंने अपना सामान देखा, तो पता चला कि परिवार की एक महिला ने अपने सोने के गहने कहीं खो दिए हैं। परिवार के लोगों ने होटल और आसपास की जगहों पर गहनों की तलाश की, लेकिन वे नहीं मिले। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद यह लगभग साफ़ हो गया था कि गहने श्रीनगर से 70 किमी दूर स्थित पहलगाम में ही कहीं गुम हुए हैं। यानी गहनों के वापस मिलने की उम्मीद अब ना के बराबर ही रह गई थी।

लेकिन, महिला के पिता ने अपने कैब ड्राइवर ताहिर से बात की और उससे पहलगाम के उन खच्चर वालों का पता लगाने को कहा, जिन्होंने उनके परिवार को सैर करवाई थी। बताते हैं कि ताहिर ने खच्चर वालों का पता लगाया और उनसे फोन पर बात की दोनों खच्चर वालों (रफीक और अफ़रोज) ने ताहिर को बताया कि उन्हें गहने मिले हैं और वे वापस लौटाने के लिए श्रीनगर आ रहे हैं। गुजराती परिवार के मुताबिक उन्हें तब विश्वास नहीं हुआ, जब रफीक और अफरोज ने फोन करके बताया कि उन्हें गुम हुए गहना मिल गए हैं और वे गहने वापस लौटने के लिए श्रीनगर आ रहे हैं। इसके बाद ये दोनों खच्चर वाले गहने वापस लौटाने 70 किलोमीटर की दूरी तय कर श्रीनगर पहुंचे इस घटना के बाद से कश्मीर में रफीक और अफरोज की ईमानदारी की काफी चर्चा हो रही है।

घटना से जुड़ा एक वीडियो जम्मू-कश्मीर टूरिज़म (Jammu-Kashmir Tourism) ने अपने ट्विटर हैन्डल पर भी शेयर किया है। जिसमें गहने खोने वाली महिला के पिता रफीक और अफरोज की तारीफ कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर टूरिज्म ने अपने इस ट्वीट में लिखा है, “खच्चर वाले रफीक और अफरोज ने ईमानदारी और कश्मीरियत की मिसाल कायम की है। उन्होंने पर्यटकों के खोए हुए सोने के गहने लौटा दिए, जो उन्हें पहलगाम में मिले थे, इन दोनों ने श्रीनगर तक 70 किलोमीटर का सफर तय किया, ताकि गहने उसके सही मालिक को मिल सकें. जम्मू-कश्मीर पर्यटन इन की ईमानदारी को सलाम करता है। ”

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